दमोह जिले के गुंजी गांव में शुक्रवार को एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई, जहां करंट लगने से तीन मोरों की मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब तीनों मोर गांव के पास स्थित तालाब से पानी पीने के बाद एक बिजली ट्रांसफार्मर पर जाकर बैठ गए। बिजली आपूर्ति शुरू होते ही वे करंट की चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है और वन्यजीव संरक्षण के मुद्दे पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक शुक्रवार दोपहर गांव के आसपास स्थित तालाब पर तीन मोर पानी पीने पहुंचे थे। गर्मी के मौसम में अक्सर मोर और अन्य पक्षी पानी की तलाश में गांवों और खेतों के आसपास दिखाई देते हैं। पानी पीने के बाद तीनों मोर पास में लगे बिजली ट्रांसफार्मर पर जाकर बैठ गए। उस समय बिजली सप्लाई बंद थी, इसलिए किसी को यह अंदेशा नहीं था कि कुछ ही देर में बड़ा हादसा हो जाएगा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही बिजली आपूर्ति बहाल हुई, ट्रांसफार्मर में अचानक करंट दौड़ गया और उस पर बैठे तीनों मोर उसकी चपेट में आ गए। तेज धमाके जैसी आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके की ओर दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तीनों मोर ट्रांसफार्मर से नीचे गिर चुके थे और उनकी मौत हो चुकी थी।
घटना की जानकारी तुरंत वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने पंचनामा तैयार कर मृत मोरों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन विभाग द्वारा तीनों मोरों का अंतिम संस्कार किया गया। घटना के दौरान गांव में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और राष्ट्रीय पक्षी की मौत पर दुख जताया।

ईश्वर जरांडे ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बिजली बहाल होने के समय मोर ट्रांसफार्मर पर बैठे हुए थे, जिससे वे करंट की चपेट में आ गए। उन्होंने कहा कि वन विभाग इस पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगा और यह भी देखा जाएगा कि ट्रांसफार्मर के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं।
इस घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि गांवों में लगे कई ट्रांसफार्मर खुले और असुरक्षित हालत में हैं। ट्रांसफार्मरों के आसपास सुरक्षा जाली या कवर नहीं होने के कारण अक्सर पक्षियों और जानवरों के लिए खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग से मांग की है कि ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में पानी और छांव की तलाश में पक्षी अक्सर बिजली के खंभों और ट्रांसफार्मरों पर बैठ जाते हैं। यदि बिजली उपकरण सुरक्षित न हों तो ऐसे हादसे होना आम बात है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि ट्रांसफार्मरों के ऊपर इंसुलेटेड कवर और सुरक्षा जाल लगाए जाएं ताकि पक्षियों को करंट लगने से बचाया जा सके।
मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित दर्जा प्राप्त है। ऐसे में एक साथ तीन मोरों की मौत न केवल पर्यावरणीय चिंता का विषय है बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में खुले बिजली उपकरणों का सर्वे कराया जाए और जरूरी सुरक्षा उपाय तत्काल लागू किए जाएं।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि विकास और बिजली व्यवस्था के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में भी इस तरह के हादसे सामने आते रहेंगे और बेजुबान वन्यजीव अपनी जान गंवाते रहेंगे।