डबरा में अंबेडकर प्रतिमा विवाद शांत: नया चश्मा लगने के बाद 20 घंटे का आंदोलन खत्म, इलाके में पुलिस तैनात !

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ग्वालियर जिले के डबरा शहर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का चश्मा टूटने के बाद शुरू हुआ विवाद आखिरकार करीब 20 घंटे बाद शांत हो गया। प्रशासन द्वारा प्रतिमा का जीर्णोद्धार कर नया चश्मा लगाए जाने के बाद प्रदर्शनकारी मान गए और आंदोलन समाप्त कर दिया गया। हालांकि एहतियात के तौर पर इलाके में अब भी भारी पुलिस बल तैनात है।

पूरा विवाद डबरा शहर के शुगर मिल गेट स्थित डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को लेकर शुरू हुआ था। गुरुवार रात प्रतिमा का चश्मा टूटकर नीचे गिर गया था। इसकी जानकारी मिलते ही भीम आर्मी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहां बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे और नारेबाजी शुरू हो गई।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि महापुरुषों के सम्मान से जुड़ा मामला है। उन्होंने प्रशासन से नई प्रतिमा लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। ग्वालियर से एडिशनल एसपी जयराज कुबेर, तीन डीएसपी, कई थाना प्रभारी और पुलिस लाइन से अतिरिक्त बल डबरा बुलाया गया। देखते ही देखते शुगर मिल चौराहा पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।

पुलिस अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से कई दौर की बातचीत की। प्रशासन की ओर से प्रतिमा की मरम्मत और नए चश्मे लगाने का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन प्रदर्शनकारी नई प्रतिमा लगाने की मांग पर अड़े रहे। इसी दौरान माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धरने के बीच एक वाहन वहां से गुजर रहा था, जिस पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव कर दिया। वाहन में तोड़फोड़ होने के बाद वाहन मालिक के साथी भी मौके पर पहुंच गए। इससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और स्थिति उपद्रव जैसी बनने लगी। दोनों ओर से नारेबाजी शुरू हो गई।

मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल को अलर्ट मोड पर रखा गया। एक पक्ष को समझाकर शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने भेजा गया, जबकि भीम आर्मी कार्यकर्ताओं को भी सख्ती के साथ मौके से हटाया गया। इसके बाद देर रात हालात कुछ हद तक नियंत्रण में आए।

रातभर अंबेडकर प्रतिमा और आसपास के इलाके में पुलिस बल तैनात रहा। शुक्रवार सुबह फिर से भीम आर्मी कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और धरना जारी रखा। दिनभर प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत चलती रही, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई।

शाम के समय पुलिस अधिकारियों ने एक बार फिर आंदोलनकारियों से चर्चा की। आखिरकार सहमति बनने के बाद प्रशासन ने तत्काल मिस्त्री बुलवाकर प्रतिमा का दोबारा रंग-रोगन कराया और नया चश्मा लगवाया। इसके साथ ही सुरक्षा के लिहाज से अंबेडकर चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए।

करीब 20 घंटे से ज्यादा समय तक चले इस आंदोलन के समाप्त होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए मौके पर सुरक्षा बल तैनात रखा गया है।

एडिशनल एसपी जयराज कुबेर ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को समझाने के बाद आंदोलन समाप्त करा दिया गया है। प्रतिमा को ठीक करा दिया गया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रतिमाओं की देखरेख की जाए तो इस तरह के विवादों से बचा जा सकता है।

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