दमोह जिले में सोमवार शाम अचानक बदले मौसम ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। तेज आंधी-तूफान और बारिश के बीच कच्ची दीवार गिरने से एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा रनेह थाना क्षेत्र के महुआ खेड़ा गांव में हुआ, जहां महिला घर के पास रखे कंडों (उपलों) को बचाने गई थी, लेकिन उसी दौरान दीवार भरभराकर गिर गई और वह उसके मलबे में दब गईं।
मृतक महिला की पहचान रागनी पटेरिया (48) पत्नी राजेश पटेरिया के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिजनों के अनुसार, सोमवार शाम अचानक मौसम ने करवट ली और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। आंधी इतनी तेज थी कि कई जगह पेड़ और कमजोर ढांचे प्रभावित हुए।

परिवार के भतीजे अभिषेक पटेरिया ने बताया कि घर के पास पड़ोसी की कच्ची दीवार के पास कंडे रखे हुए थे। बारिश शुरू होते ही रागनी उन्हें भीगने से बचाने के लिए ढकने पहुंचीं। इसी दौरान तेज हवा के दबाव से पास की कच्ची दीवार अचानक गिर गई और वह सीधे उसके नीचे दब गईं।
महिला की चीख सुनकर घर के अन्य सदस्य और आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया। उस समय उनकी हालत बेहद गंभीर थी। बिना समय गंवाए परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर रवाना हुए।
घायल अवस्था में रागनी को हटा सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, मलबे में दबने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी या अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

इस हादसे की सूचना मिलते ही रनेह थाना पुलिस भी सक्रिय हुई और अस्पताल पहुंचकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। मंगलवार सुबह महिला के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस दीवार के गिरने से हादसा हुआ, वह काफी पुरानी और जर्जर थी। तेज आंधी और बारिश के कारण वह ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई और गिर गई। गांव में कई अन्य कच्चे मकान और दीवारें भी ऐसी ही स्थिति में हैं, जिससे भविष्य में ऐसे हादसों की आशंका बनी रहती है।
गौरतलब है कि सोमवार शाम दमोह जिले में अचानक मौसम में बड़ा बदलाव देखा गया था। दिनभर की गर्मी के बाद शाम को तेज आंधी-तूफान और बारिश शुरू हो गई। कई क्षेत्रों में तेज हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित किया। रनेह थाना क्षेत्र में आंधी का असर विशेष रूप से ज्यादा रहा, जहां कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचा।
यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों और दीवारों की स्थिति कितनी जोखिम भरी हो सकती है, खासकर जब मौसम अचानक बिगड़ जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि आंधी-तूफान के दौरान लोगों को जर्जर संरचनाओं से दूर रहना चाहिए और खुले स्थानों में सावधानी बरतनी चाहिए।

रागनी पटेरिया के निधन से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वे घर की जिम्मेदारियों को संभालने के साथ-साथ रोजमर्रा के कामों में सक्रिय रहती थीं। गांव के लोगों ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और प्रशासन से मांग की है कि जर्जर भवनों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा सभी के लिए एक चेतावनी है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।