दमोह कलेक्टर की जनसुनवाई में सख्ती, बिजली विभाग को फटकार; 9 माह से रुके वेतन पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश !

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दमोह: कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में बड़ी संख्या में आवेदक अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान कलेक्टर ने सभी विभाग प्रमुखों की उपस्थिति में एक-एक कर शिकायतों की सुनवाई की और कई मामलों में मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए।

जनसुनवाई में कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि शिकायतों का त्वरित निराकरण होने से आम जनता का प्रशासन पर भरोसा बढ़ता है, इसलिए सभी अधिकारियों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि किसी भी शिकायत को अनदेखा न किया जाए और समय सीमा में उसका निपटारा किया जाए।


शहर क्षेत्र की कुछ महिलाओं ने जनसुनवाई में बिजली विभाग से जुड़ी शिकायतें रखीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मनमाने बिजली बिल दिए जा रहे हैं और कई स्थानों पर बिना उचित प्रक्रिया के बिजली के तार भी जब्त किए गए हैं। इस पर कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए बिजली विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई और जब्त किए गए तारों को तुरंत वापस करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने साफ कहा कि बिना वैध मीटर लगाए किसी भी उपभोक्ता को मनमाने बिल नहीं दिए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की शिकायतें दोबारा सामने नहीं आनी चाहिए और उपभोक्ता अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाए।


जनसुनवाई के दौरान जनजातीय विभाग के कर्मचारियों ने भी अपनी समस्या रखी। कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें पिछले लगभग 9 महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे पर कलेक्टर ने तुरंत संज्ञान लिया और जनजातीय विभाग के कमिश्नर तरुण राठी से फोन पर चर्चा की।

कलेक्टर की बातचीत के बाद कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि एक से दो दिनों के भीतर सभी लंबित कर्मचारियों का वेतन जारी कर दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।


जनसुनवाई में कलेक्टर ने एक नई व्यवस्था लागू करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवेदकों के सामने बैठाकर समस्याओं पर चर्चा की। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी बल्कि मामलों के समाधान में भी तेजी आई।

कलेक्टर ने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से जनसुनवाई में उपस्थित रहें ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।


अंत में कलेक्टर ने अधिकारियों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि जनता की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य लोगों को त्वरित और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिससे शासन-प्रशासन पर जनता का विश्वास और मजबूत हो सके।

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