दमोह नगर पालिका बैठक: स्लॉटर हाउस नहीं खुलेगा:13 महीने बाद हुई बैठक, 8 प्रस्तावों पर बनी सहमति !

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लगभग 13 महीने के लंबे इंतजार के बाद दमोह नगर पालिका परिषद की विशेष बैठक बुधवार को आयोजित की गई। यह बैठक कई मायनों में अहम रही, क्योंकि लंबे समय से लंबित शहर के विकास और बुनियादी समस्याओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में कुल 11 प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनमें से 8 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जबकि 3 प्रस्तावों को निरस्त कर दिया गया।

सबसे चर्चित और संवेदनशील मुद्दा शहर में स्लॉटर हाउस (कसाईखाना) खोलने का था, जिसे सभी पार्षदों की सहमति से पूरी तरह खारिज कर दिया गया। इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल दमोह शहर में कहीं भी स्लॉटर हाउस नहीं खोला जाएगा।


लंबे अंतराल के बाद हुई बैठक, प्रशासनिक पृष्ठभूमि

नगर पालिका की यह बैठक फरवरी 2025 के बाद पहली बार आयोजित की गई। उस समय कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते तत्कालीन कलेक्टर ने बैठक को स्थगित कर दिया था। बाद में राज्य शासन ने इस आदेश को निरस्त किया, जिसके बाद 29 अप्रैल 2026 को विशेष बैठक की तारीख तय की गई।

नगर पालिका के मीटिंग हॉल में आयोजित इस बैठक में अध्यक्ष मंजू राय, सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी सहित सभी वार्डों के पार्षद मौजूद रहे। बैठक को लेकर शुरुआत में कुछ विरोध के स्वर जरूर उठे, लेकिन कुल मिलाकर यह बैठक अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रही और अधिकांश प्रस्तावों पर सहमति बन गई।


स्लॉटर हाउस पर सख्त रुख

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित विषय स्लॉटर हाउस का प्रस्ताव रहा। शहर में इसे खोलने को लेकर अलग-अलग मत सामने आए, लेकिन अंततः सभी पार्षदों ने इसे खारिज करने पर सहमति जताई।

इस फैसले के पीछे स्थानीय सामाजिक और धार्मिक संवेदनाओं को ध्यान में रखा गया। कई पार्षदों का मानना था कि शहर में इस तरह की व्यवस्था से विवाद की स्थिति बन सकती है, इसलिए इसे टालना ही उचित होगा।

यह निर्णय नगर पालिका की नीति और शहर के सामाजिक संतुलन को बनाए रखने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


किन प्रस्तावों पर बनी सहमति

बैठक में जिन 8 प्रस्तावों को मंजूरी मिली, उनमें शहर के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं से जुड़े कई अहम फैसले शामिल हैं—

  • नई पानी की टंकियों का निर्माण: नया बाजार वार्ड 4 और बजरिया वार्ड 5 में नई पानी की टंकी बनाई जाएगी।
  • शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए स्वागत द्वार: शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर दो स्वागत गेट बनाए जाएंगे।
  • पेयजल संकट से निपटने की योजना: जहां पानी की समस्या अधिक है, वहां टैंकर के जरिए जल आपूर्ति की जाएगी।
  • अन्य विकास कार्य: सड़क, नाली और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े छोटे-बड़े कार्यों को भी मंजूरी दी गई।

इन प्रस्तावों के लागू होने से शहरवासियों को आने वाले समय में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


जिन प्रस्तावों पर नहीं बनी सहमति

बैठक में तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति नहीं बन सकी, जिन्हें निरस्त कर दिया गया—

  1. प्रधानमंत्री आवास योजना (एचपी घटक) से जुड़ी पुरानी निविदा को निरस्त कर नई निविदा जारी करना।
  2. निर्मित भवनों को नीलामी प्रणाली के तहत आवंटित करने का प्रस्ताव।
  3. कचरा संग्रहण के लिए 4 करोड़ 82 लाख रुपए का टेंडर जारी करना।

इन प्रस्तावों पर पार्षदों के बीच मतभेद सामने आए, जिसके चलते इन्हें फिलहाल टाल दिया गया।


पेयजल संकट पर फोकस

बैठक में शहर के सबसे गंभीर मुद्दों में से एक—पेयजल संकट—पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वर्तमान में दमोह के कई इलाकों में पानी की भारी कमी बनी हुई है।

सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि जुझार घाट और राजनगर जलाशय में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण पानी सप्लाई प्रभावित हुई है। इसी वजह से शहर में दो-दो दिन के अंतराल पर पानी दिया जा रहा है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि बिजली आपूर्ति सुचारू रहती है, तो एक दिन के अंतराल पर नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, जिन क्षेत्रों में समस्या ज्यादा है, वहां टैंकर से पानी पहुंचाया जाएगा।


विपक्षी पार्षदों के आरोप

हालांकि बैठक में कई प्रस्तावों पर सहमति बनी, लेकिन विपक्षी पार्षदों ने नाराजगी भी जताई। उनका आरोप है कि बैठक में उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना गया और कई मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया गया।

  • मांगंज वार्ड 5 के प्रतिनिधि कृष्णा तिवारी ने कहा कि उनके क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्या है, लेकिन इस पर चर्चा नहीं की गई।
  • बजरिया वार्ड 8 की पार्षद हिना खान ने नाली और सड़क निर्माण के अभाव की समस्या उठाई, लेकिन इसे अनदेखा कर दिया गया।
  • मोनू राजपूत ने भी आरोप लगाया कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

इन आरोपों से साफ है कि नगर पालिका के भीतर अब भी मतभेद मौजूद हैं, जो भविष्य में प्रशासन के लिए चुनौती बन सकते हैं।


बैठक का महत्व और आगे की राह

13 महीने बाद हुई इस बैठक को नगर पालिका के कामकाज को पटरी पर लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित निर्णयों को लेकर यह बैठक जरूरी थी, जिससे विकास कार्यों को गति मिल सके।

हालांकि, कुछ अहम प्रस्तावों पर सहमति न बनना और विपक्ष के आरोप यह संकेत देते हैं कि अभी भी समन्वय की कमी बनी हुई है। यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर काम करें, तो शहर की समस्याओं का समाधान तेजी से किया जा सकता है।


दमोह नगर पालिका की इस विशेष बैठक ने जहां कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी, वहीं कुछ मुद्दों पर मतभेद भी उजागर किए। स्लॉटर हाउस का प्रस्ताव खारिज होना इस बैठक का सबसे बड़ा निर्णय रहा, जबकि पेयजल और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करना शहर के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिन प्रस्तावों को मंजूरी मिली है, उन्हें कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारा जाता है। शहरवासियों को इन फैसलों से राहत तभी मिलेगी, जब योजनाएं समय पर पूरी हों और उनका लाभ आम जनता तक पहुंचे।

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