मध्य प्रदेश के दमोह जिला परिवहन कार्यालय की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिला परिवहन अधिकारी (DTO) के लंबे समय से कार्यालय से अनुपस्थित रहने और मोबाइल फोन बंद होने के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। फिटनेस, परमिट, लाइसेंस नवीनीकरण और वाहन संबंधी अन्य आवश्यक कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। दूर-दराज से आने वाले लोग घंटों इंतजार करने के बाद बिना काम के लौटने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, जिला परिवहन अधिकारी क्षितिज सोनी पिछले शुक्रवार से अवकाश पर हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्होंने अपने दोनों मोबाइल नंबर भी बंद कर रखे हैं, जिससे न तो आम नागरिक और न ही विभागीय कर्मचारी उनसे संपर्क कर पा रहे हैं। कार्यालय में उनकी अनुपस्थिति के चलते पूरा सिस्टम अस्त-व्यस्त हो गया है।

7 किलोमीटर दूर पहुंचकर लौट रहे लोग
दमोह शहर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित परिवहन कार्यालय में रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपने जरूरी कामों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन कार्यालय पहुंचने पर अधिकारी का कक्ष बंद मिलता है। बुधवार दोपहर भी यही स्थिति देखने को मिली। कार्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा रहा और कई कर्मचारी भी अनुपस्थित मिले।
ऑटो चालक सचिन उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने ऑटो परमिट के लिए लगभग एक महीने पहले आवेदन जमा किया था। इसके बावजूद अभी तक उनका काम पूरा नहीं हो पाया है। वे पिछले चार से पांच बार कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हर बार अधिकारी नहीं मिलते। परमिट नहीं बनने के कारण परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस द्वारा की जा रही चेकिंग में लगातार चालान काटे जा रहे हैं। इससे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी बढ़ रही है।
लाइसेंस और फिटनेस कार्य भी प्रभावित
सिर्फ परमिट ही नहीं, बल्कि लाइसेंस नवीनीकरण और वाहन फिटनेस जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हैं। लाइसेंस नवीनीकरण के लिए पहुंचे सुमित यादव ने बताया कि वे सुबह से कार्यालय में इंतजार करते रहे, लेकिन संबंधित अधिकारी के नहीं आने से उनका काम नहीं हो सका।

इसी तरह ऑटो की फिटनेस करवाने आए धीरज रजक को भी निराश होकर वापस लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि फिटनेस प्रमाणपत्र के बिना वाहन सड़क पर चलाना जोखिम भरा है और पुलिस कार्रवाई का डर अलग बना रहता है। बावजूद इसके कार्यालय में सुनवाई नहीं हो रही।
कार्यालय में कर्मचारियों की भारी कमी
जिला परिवहन कार्यालय की बदहाल व्यवस्था के पीछे कर्मचारियों की भारी कमी भी एक बड़ा कारण बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, कार्यालय में परिवहन अधिकारी के अलावा केवल एक बाबू ही पदस्थ है। यही वजह है कि अधिकारी के अवकाश पर जाते ही पूरा कार्यालय लगभग ठप हो जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, अधिकारी ने कुछ निजी कर्मचारियों को भी काम पर रखा हुआ है, लेकिन उनकी जवाबदेही तय नहीं है। अधिकारी की अनुपस्थिति में ये कर्मचारी भी कार्यालय से गायब रहते हैं। इससे आम लोगों को किसी प्रकार की जानकारी या सहायता नहीं मिल पाती।
कंडम वाहनों पर कार्रवाई नहीं
परिवहन विभाग की लापरवाही का असर सड़क सुरक्षा पर भी दिखाई दे रहा है। शहर में पहले भी कई सड़क दुर्घटनाएं कंडम और बिना फिटनेस वाले वाहनों के कारण हो चुकी हैं। इस संबंध में पूर्व कलेक्टर द्वारा जिला परिवहन अधिकारी को फटकार भी लगाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद विभाग की कार्यशैली में कोई सुधार नजर नहीं आया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क पर बड़ी संख्या में बिना फिटनेस वाले वाहन दौड़ रहे हैं, लेकिन विभाग कार्रवाई करने में गंभीरता नहीं दिखा रहा। अब अधिकारी की अनुपस्थिति ने स्थिति को और खराब कर दिया है।
जनता में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार हो रही परेशानियों के कारण लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों की जिम्मेदारी जनता को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन यहां हालात बिल्कुल विपरीत हैं। लोग कई किलोमीटर दूर से समय और पैसा खर्च करके पहुंचते हैं, लेकिन काम नहीं होने से उन्हें निराशा हाथ लगती है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जिला परिवहन कार्यालय की व्यवस्था तत्काल सुधारी जाए। यदि अधिकारी लंबे अवकाश पर हैं तो उनके स्थान पर वैकल्पिक अधिकारी की नियुक्ति की जाए, ताकि आम जनता के जरूरी कार्य प्रभावित न हों।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। परिवहन अधिकारी से संपर्क करने की लगातार कोशिशें की गईं, लेकिन उनके दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए इतने महत्वपूर्ण विभाग का संचालन कैसे छोड़ा जा सकता है।
जनता अब प्रशासन से त्वरित कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है।