दमोह जिले के पथरिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। रविवार को पुलिस ने गश्त के दौरान दो युवकों को गिरफ्तार किया, जो बाइक के जरिए गांजे की बड़ी खेप सप्लाई करने जा रहे थे। आरोपियों के कब्जे से कुल 1 किलो 961 ग्राम गांजा बरामद किया गया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
यह कार्रवाई शाहपुर रोड पर उस समय हुई जब पुलिस टीम संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए नियमित गश्त कर रही थी। इसी दौरान एक बाइक पर सवार दो युवक तेज गति से गुजरते हुए दिखाई दिए। पुलिस को उनकी गतिविधियों पर शक हुआ, जिसके बाद उन्हें रोकने का इशारा किया गया, लेकिन युवकों ने भागने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने तुरंत पीछा कर दोनों को कुछ ही दूरी पर पकड़ लिया।
गश्त के दौरान हुआ खुलासा
थाना प्रभारी श्याम सुंदर दुबे के अनुसार पुलिस टीम शाहपुर रोड क्षेत्र में एक अन्य मामले में आरोपी की तलाश और निगरानी के लिए मौजूद थी। इसी दौरान यह घटना सामने आई। बाइक सवार युवकों के व्यवहार और उनकी घबराहट को देखकर पुलिस को संदेह हुआ, जिसके बाद कार्रवाई की गई।

जब दोनों युवकों को रोका गया और उनकी तलाशी ली गई तो बाइक पर रखे बैग से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह मादक पदार्थ बिक्री के लिए दमोह शहर की ओर ले जाया जा रहा था।
बरामद हुआ 1 किलो 961 ग्राम गांजा
पुलिस द्वारा की गई तलाशी में आरोपियों के पास से कुल 1 किलो 961 ग्राम गांजा बरामद हुआ। यह मात्रा सामान्य उपभोक्ता स्तर से कहीं अधिक मानी जाती है और इसे अवैध तस्करी की श्रेणी में गंभीर अपराध माना जाता है। पुलिस ने तुरंत दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया और गांजे के स्रोत व नेटवर्क की जानकारी जुटाने के लिए पूछताछ शुरू की।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नंदराम और दामोदर के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि नंदराम बाइक चला रहा था, जबकि दामोदर के पास से गांजा बरामद हुआ। बाइक को भी जब्त कर लिया गया है, जिसका उपयोग तस्करी में किया जा रहा था।
ओडिशा से जुड़े नेटवर्क की आशंका
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने यह गांजा ओडिशा से एक व्यक्ति, जिसे वे “बाबा” के नाम से जानते हैं, से खरीदा था। हालांकि पुलिस इस बयान की सत्यता की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह किसी बड़े अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह का हिस्सा है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की खेपें अक्सर बाहरी राज्यों से मध्य प्रदेश में लाई जाती हैं और स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए बेची जाती हैं। ऐसे में यह मामला केवल दो आरोपियों तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
नशे के खिलाफ अभियान तेज
दमोह पुलिस पिछले कुछ समय से जिले में नशे के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है। खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गांजा, शराब और अन्य नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना प्राथमिकता है।
थाना प्रभारी श्याम सुंदर दुबे ने बताया कि गश्त के दौरान मिली यह सफलता पुलिस की सतर्कता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और किसी भी हालत में नशे के कारोबार को पनपने नहीं दिया जाएगा।
न्यायालय में पेशी, जेल भेजे गए आरोपी
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। रविवार दोपहर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी पहले भी किसी तस्करी गतिविधि में शामिल रहे हैं या नहीं। इसके अलावा उनके मोबाइल फोन और संपर्कों की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
स्थानीय स्तर पर चिंता
इस घटना के बाद क्षेत्र में नशे की बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंता जताई जा रही है। ग्रामीण इलाकों में गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की उपलब्धता युवाओं को प्रभावित कर रही है। स्थानीय लोगों ने पुलिस से मांग की है कि इस तरह के नेटवर्क पर पूरी तरह से लगाम लगाई जाए और नियमित निगरानी बढ़ाई जाए।
पुलिस ने भी आश्वासन दिया है कि ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि सप्लाई चेन को खत्म करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
दमोह के पथरिया थाना क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई नशे के खिलाफ चल रही मुहिम की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। भले ही पुलिस ने दो तस्करों को गिरफ्तार कर बड़ी मात्रा में गांजा बरामद किया हो, लेकिन यह साफ है कि इस तरह के मामलों के पीछे बड़े नेटवर्क सक्रिय हैं। पुलिस अब इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में जुट गई है, ताकि जिले को नशे के खतरे से पूरी तरह मुक्त किया जा सके।