दमोह में भीषण गर्मी का कहर: तापमान 44 डिग्री पहुंचा, जनजीवन प्रभावित !

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दमोह
दमोह जिले में गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। शुक्रवार को जिले का अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। तेज धूप, गर्म हवाओं और उमस भरे मौसम के कारण लोग दिनभर परेशान नजर आए। दोपहर के समय शहर की सड़कें लगभग सूनी दिखाई दीं और केवल जरूरी काम से निकलने वाले लोग ही बाहर नजर आए।

भीषण गर्मी के चलते शहर के प्रमुख बाजारों और मार्गों पर सामान्य दिनों की तुलना में आवाजाही कम रही। लोग धूप से बचने के लिए छायादार स्थानों की तलाश करते दिखे। कई लोग सिर पर टोपी, गमछा और तौलिया बांधकर बाहर निकले, जबकि कुछ लोग चेहरे को पूरी तरह ढंककर गर्म हवाओं से बचने का प्रयास करते नजर आए।

शहर में जगह-जगह ठंडे पेय पदार्थों, गन्ने के रस, शिकंजी और नारियल पानी की दुकानों पर लोगों की भीड़ दिखाई दी। लोग गर्मी से राहत पाने के लिए लगातार ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करते नजर आए। तेज धूप के कारण सड़कें दूर से चमकती हुई दिखाई दे रही थीं और गर्म हवाओं के थपेड़ों ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी।

गर्मी का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल में उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ऐसे मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जिनकी तबीयत तेज गर्मी और लू के कारण बिगड़ रही है।

विजय पथोरिया ने बताया कि इस समय जिले में भीषण गर्मी का प्रकोप बना हुआ है और लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दोपहर के समय तेज धूप में निकलने से बचना चाहिए और यदि संभव हो तो सुबह या शाम के समय ही आवश्यक कार्य निपटाने चाहिए।

डॉ. पथोरिया ने सलाह दी कि यदि किसी जरूरी काम से बाहर निकलना पड़े तो शरीर को पूरी तरह कपड़ों से ढककर निकलें। सिर को ढंकना बेहद जरूरी है ताकि सीधे धूप का असर कम हो सके। उन्होंने लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देने की अपील की।

उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ती है। ऐसे में बार-बार पानी पीना, ओआरएस, नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करना जरूरी है। खासकर खेतों, निर्माण स्थलों और खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

डॉक्टरों ने बाहर खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचने की भी सलाह दी है। उनका कहना है कि गर्मी के कारण खाद्य सामग्री जल्दी खराब हो जाती है, जिससे फूड पॉइजनिंग और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लोगों को ताजे फल, घर का बना भोजन और स्वच्छ पानी का सेवन करने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस समय दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक का समय सबसे अधिक खतरनाक है। इस दौरान गर्म हवाएं और तेज धूप शरीर पर गंभीर असर डाल सकती हैं। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

शहर के कई इलाकों में दोपहर के समय सन्नाटा देखने को मिला। लोग घरों में ही रहना पसंद कर रहे हैं। बाजारों में भी ग्राहकों की संख्या कम दिखाई दी। वहीं बिजली की बढ़ती खपत के कारण लोग कूलर, पंखे और एसी का अधिक उपयोग कर रहे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी तापमान में विशेष राहत मिलने की संभावना कम है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन लगातार लोगों से सतर्क रहने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की अपील कर रहे हैं।

भीषण गर्मी के इस दौर में चिकित्सकों ने लोगों से सावधानी बरतने, पर्याप्त पानी पीने और अनावश्यक रूप से धूप में बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है, ताकि लू और गर्मी से होने वाली गंभीर बीमारियों से बचा जा सके।

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