दमोह जिले के हटा थाना क्षेत्र में एक अत्यंत संवेदनशील और मानवता को शर्मसार करने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। मात्र 11 वर्ष की एक नाबालिग बच्ची के साथ दो स्थानीय युवकों ने कथित तौर पर दो बार गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया। पीड़िता बच्ची ने बुधवार रात को अपने परिजनों के साथ हटा थाने पहुंचकर दोनों आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।
महिला सब-इंस्पेक्टर प्रीति पांडे, जो मामले की जांच कर रही हैं, ने बताया कि यह घटना पहली बार नहीं हुई। लगभग 10-12 दिन पहले भी इन दोनों युवकों ने बच्ची के साथ गलत काम किया था। मासूम इतनी भयभीत और सदमे में थी कि उसने घरवालों को इस बारे में कुछ नहीं बताया। आरोपियों ने इसी डर और चुप्पी का फायदा उठाया और मंगलवार रात को दोबारा बच्ची को निशाना बनाया। उन्होंने उसके साथ दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। बच्ची की यह चुप्पी अंततः टूटी जब घटना की पुनरावृत्ति ने उसके मनोबल को पूरी तरह तोड़ दिया।
आरोपी कौन हैं?
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी हटा क्षेत्र के ही रहने वाले हैं:
- दानिश कुरैशी (20 वर्ष)
- वारिक (19 वर्ष)
दोनों युवक घटना के तुरंत बाद फरार हो गए हैं। पुलिस की कई टीमें उनके ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और विभिन्न गांवों व आसपास के इलाकों में छापेमारी जारी है। हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी ने बताया कि शिकायत मिलते ही दोनों के खिलाफ POCSO एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences), गैंगरेप (Section 376D IPC), धमकी और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस की कार्रवाई और मेडिकल जांच
पीड़िता का विस्तृत बयान दर्ज करने के बाद उसे तुरंत मेडिकल जांच के लिए दमोह जिला अस्पताल भेज दिया गया। डॉक्टरी रिपोर्ट का इंतजार है, जो मामले में महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकती है। पुलिस ने बच्ची की सुरक्षा के लिए भी कदम उठाए हैं और परिवार को आवश्यक सहायता मुहैया कराई जा रही है। थाना प्रभारी सुधीर बेगी ने आश्वासन दिया कि आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और उन्हें सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी।
इस घटना की खबर फैलते ही हटा और आसपास के इलाकों में लोगों में भारी गुस्सा और आक्रोश फैल गया है। स्थानीय निवासी सड़कों पर उतर आए और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि नाबालिग बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासन को और ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। महिलाओं और बच्चों के प्रति बढ़ते अपराधों ने पूरे समाज को चिंतित कर दिया है। कुछ स्थानीय संगठनों ने भी इस मामले में न्याय की मांग की है और प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।
यह मामला मध्य प्रदेश में नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों की एक और कड़ी है। POCSO एक्ट के तहत ऐसे मामलों में सख्त प्रावधान हैं, जिसमें न्यूनतम 20 वर्ष की सजा और अधिकतम आजीवन कारावास या फांसी का प्रावधान है, खासकर गैंगरेप के मामलों में। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कानून सख्त होने के बावजूद क्रियान्वयन और जागरूकता की कमी अपराधों को बढ़ावा दे रही है।
बच्ची की उम्र महज 11 वर्ष है, जो कि बेहद संवेदनशील आयु है। इस घटना से उसका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हुआ होगा। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसी घटनाओं के बाद पीड़िता को लंबे समय तक काउंसलिंग और सपोर्ट की जरूरत होती है। परिवार भी सदमे में है और समाज में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी छोटी बच्ची अकेले कैसे बाहर निकली और आरोपी इतने हद तक कैसे पहुंच गए।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि अगर किसी को इन आरोपियों के बारे में कोई जानकारी हो तो तुरंत हटा थाने या नियंत्रण कक्ष में सूचना दें। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने से बचें, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।
यह घटना न केवल कानून व्यवस्था बल्कि पूरे समाज की नैतिकता पर सवाल खड़ा करती है। जब 11 साल की मासूम दो बार इस तरह की दरिंदगी का शिकार होती है तो जिम्मेदारी किसकी है? अभिभावक, समाज, पुलिस और सरकार — सभी को मिलकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। स्कूलों, मोहल्लों और गांवों में जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
पुलिस जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और अपडेट्स सामने आ सकते हैं। इस मामले पर पूरी नजर रखी जा रही है। समाज को उम्मीद है कि न्याय शीघ्र मिलेगा और मासूम को इंसाफ जरूर मिलेगा।