दमोह जिले के जबेरा थाना क्षेत्र अंतर्गत तेलनघाटी पहाड़ी पर सामने आया पशु क्रूरता का एक बेहद सनसनीखेज मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटना में 500 फीट ऊंची पहाड़ी से भैंसों को नीचे धकेलकर 11 भैंसों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो भैंसें गंभीर रूप से घायल हो गईं। पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए गांव के ही पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
यह पूरी घटना मंगलवार रात की बताई जा रही है, जब कंजई मानगढ़ गांव के कुछ लोगों की भैंसें कथित रूप से खेतों में घुसकर मूंग की फसल को नुकसान पहुंचा रही थीं। इसी बात से नाराज होकर कुछ ग्रामीणों ने एक गंभीर और क्रूर कदम उठाया। आरोप है कि उन्होंने 13 भैंसों को पकड़कर उन्हें जबरन तेलनघाटी की ऊंची पहाड़ी पर ले जाया और वहां से नीचे खाई में धकेल दिया।

बुधवार सुबह जब स्थानीय राहगीर और ग्रामीण उस इलाके से गुजरे तो उन्होंने खाई में कई भैंसों के शव पड़े देखे। दृश्य बेहद भयावह था और पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। तुरंत ही इसकी सूचना जबेरा पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया कृत्य है। पुलिस ने आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों में सुभाष राय (41), परमलाल चौधरी (53), प्रवेन्द्र चौधरी (19), आनंद उर्फ कालू राय (32) और अंशुल राय (27) शामिल हैं। सभी आरोपी पौड़ी गांव के निवासी बताए जा रहे हैं।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया है। उनका कहना है कि भैंसें बार-बार उनके खेतों में घुसकर मूंग की फसल को नुकसान पहुंचा रही थीं, जिससे वे काफी नाराज थे। इसी गुस्से में उन्होंने यह कदम उठाया, जो बाद में एक गंभीर आपराधिक घटना में बदल गया।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
थाना प्रभारी विकास चौहान ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की गहराई से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि पशु क्रूरता से जुड़े इस प्रकार के मामलों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फसल नुकसान की समस्या को बातचीत या प्रशासनिक मदद से हल किया जा सकता था, लेकिन इस तरह का हिंसक कदम बेहद निंदनीय है।
वहीं, पशु प्रेमी संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि जानवरों के प्रति इस तरह की क्रूरता समाज में गलत संदेश देती है और इसे रोकने के लिए सख्त कानूनों का पालन जरूरी है।
फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना में और कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर ग्रामीण विवादों के हिंसक रूप लेने और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।