दमोह जिले की हटा थाना पुलिस ने दूसरे की कृषि भूमि पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक से लाखों रुपये का लोन लेने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है।
इस पूरे मामले का खुलासा बुधवार दोपहर हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी ने किया। उन्होंने बताया कि यह मामला वर्ष 2023 में सामने आया था, जब ग्राम रसुईया निवासी गणेश पिता मान सिंह यादव (52) ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार, फरियादी गणेश यादव की करीब साढ़े पांच हेक्टेयर कृषि भूमि पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने फर्जी तरीके से यूनियन बैंक हटा शाखा से 5 लाख 30 हजार रुपये का कृषि ऋण ले लिया था। यह लोन 9 सितंबर 2019 को स्वीकृत किया गया था। आरोपी ने खुद को गणेश यादव बताकर नकली दस्तावेज तैयार किए और जमीन को बैंक में बंधक रखकर ऋण हासिल कर लिया।
फरियादी को इस धोखाधड़ी की जानकारी काफी समय बाद लगी। बताया गया कि जब उन्होंने लोक सेवा केंद्र पटेरा से अपनी जमीन का खसरा और बीमा संबंधी सत्यापित दस्तावेज निकलवाए, तब उन्हें पता चला कि उनकी जमीन पहले से बैंक में गिरवी रखी हुई है और उनके नाम पर लोन स्वीकृत किया गया है। यह जानकारी सामने आने के बाद वे हैरान रह गए और तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हटा थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419 (छलपूर्वक प्रतिरूपण), 420 (धोखाधड़ी), 467 (महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। विवेचना और दस्तावेजों की जांच में अमर सिंह लोधी, अरविंद सिंह लोधी, भानू सिंह और कमलेश सिंह की संलिप्तता पाई गई। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों की पहचान की।
बुधवार को पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी अमर सिंह लोधी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा बैंक प्रक्रिया में किस प्रकार धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस गिरोह ने अन्य लोगों की जमीनों पर भी इसी तरह फर्जीवाड़ा कर लोन तो नहीं लिया। बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
टीआई सुधीर बेगी ने बताया कि आर्थिक अपराध और दस्तावेजों से जुड़ी धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे समय-समय पर अपनी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और बैंक संबंधी जानकारी की जांच करते रहें, ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी का समय रहते पता चल सके।
इसी दौरान पुलिस ने एक अन्य मामले में भी कार्रवाई करते हुए धोखे से ट्रक बेचने के मामले में फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस दोनों मामलों में आगे की जांच कर रही है।
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन संबंधी दस्तावेजों की सुरक्षा और बैंकिंग प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और बैंकों को ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करना चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति की संपत्ति का दुरुपयोग न हो सके।