टीकमगढ़ जिले के दिगौड़ा ग्राम पंचायत में पेयजल संकट को लेकर चल रही भूख हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। समाजसेवी रमाशंकर पस्तोर ने मंगलवार रात अधिकारियों द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन के बाद जूस पीकर अपना अनशन खत्म किया। प्रशासन ने बुधवार दोपहर 12 बजे तक नल-जल योजना के तहत पानी सप्लाई शुरू करने का भरोसा दिया है।
डेढ़ महीने से बंद थी नल-जल योजना
दिगौड़ा कस्बे में पिछले करीब डेढ़ महीने से नल-जल योजना ठप पड़ी हुई थी। भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं।
लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। खासकर महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा था।

समस्या के विरोध में शुरू की भूख हड़ताल
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए समाजसेवी रमाशंकर पस्तोर ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए मंगलवार दोपहर बस स्टैंड पर भूख हड़ताल और धरना शुरू किया।
उनका कहना था कि कई बार शिकायत और ज्ञापन देने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे वे मजबूर होकर इस रास्ते पर आए।
पहले भी दिए गए थे ज्ञापन
पस्तोर ने बताया कि ग्रामीणों ने 1 अप्रैल और 22 अप्रैल को एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत कराया था। इसके बाद 24 अप्रैल को कलेक्टर को भी सूचना देकर चेतावनी दी गई थी कि यदि 27 अप्रैल तक पानी सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो 28 अप्रैल से भूख हड़ताल की जाएगी।
लेकिन तय समय तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने अपना आंदोलन शुरू कर दिया।
अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दी समझाइश
भूख हड़ताल की सूचना मिलने के बाद मंगलवार रात करीब 8 बजे प्रशासन हरकत में आया। तहसीलदार प्राची जैन, थाना प्रभारी मनीष मिश्रा और पीएचई विभाग के एसडीओ हर्ष राय मौके पर पहुंचे।
उन्होंने समाजसेवी और ग्रामीणों से चर्चा की और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।

लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ अनशन
अधिकारियों ने लिखित में भरोसा दिया कि बुधवार दोपहर 12 बजे तक नल-जल योजना को चालू कर दिया जाएगा और पानी की सप्लाई बहाल कर दी जाएगी।
इस आश्वासन के बाद तहसीलदार प्राची जैन ने रमाशंकर पस्तोर को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया।
आंदोलन में ग्रामीणों का मिला समर्थन
इस आंदोलन में कई स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। जिला पंचायत सदस्य मनोहर लाल अहिरवार, डॉ. विष्णु राय, प्रेमनारायण लुहारिया, रवि सोनकिया, मनोज सेन, त्रिलोक त्रिपाठी और ताजुद्दीन खान सहित कई ग्रामीण धरने पर बैठे रहे।
इससे यह साफ हुआ कि पानी की समस्या पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर मुद्दा बन चुकी थी।
प्रशासन के लिए चुनौती
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने वादे को तय समय पर पूरा करे। यदि समय पर पानी सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो एक बार फिर लोगों में आक्रोश बढ़ सकता है और आंदोलन दोबारा शुरू हो सकता है।
जल संकट बना बड़ा मुद्दा
यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या कितनी गंभीर हो सकती है। गर्मी के मौसम में यह संकट और गहरा जाता है, जिससे लोगों का जीवन प्रभावित होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल आपूर्ति योजनाओं का नियमित रखरखाव और निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो।
दिगौड़ा में भूख हड़ताल का समाप्त होना फिलहाल राहत की खबर है, लेकिन असली समाधान तभी होगा जब नल-जल योजना समय पर शुरू होकर नियमित रूप से चलती रहे।
यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है कि बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी से लोगों को आंदोलन का सहारा लेना पड़ता है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन अपने वादे को कितनी गंभीरता से निभाता है।