भोपाल। भारत सरकार ने वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस सूची में मध्यप्रदेश की तीन विशिष्ट हस्तियों को पद्मश्री सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है। इनमें भोपाल के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार कैलाश चंद्र पंत, सागर के मार्शल आर्ट कलाकार भगवानदास रैकवार और मप्र जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर शामिल हैं।
घर में जश्न का माहौल
पद्मश्री की घोषणा के बाद भोपाल स्थित कैलाश चंद्र पंत के निवास पर खुशी का माहौल देखने को मिला। परिवार के सदस्य, दामाद और बेटियां घर पहुंचे और मिठाइयां बांटी गईं। मित्रों और शुभचिंतकों के फोन लगातार आते रहे।

“राष्ट्रीय सम्मान मिलना गर्व की बात” – कैलाश चंद्र पंत
दैनिक भास्कर से बातचीत में कैलाश चंद्र पंत ने कहा,
“राष्ट्रीय स्तर का सम्मान मिलना गर्व की बात है। परिवार और बच्चों की खुशी देखकर मन और भी प्रसन्न हो जाता है।”
उन्होंने बताया कि उन्हें इसकी सूचना सुबह 9:30 बजे गृह मंत्रालय से फोन कॉल के जरिए दी गई। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि उन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में पद्मश्री दिया जा रहा है।

13 वर्ष की उम्र में गए थे जेल
अपने जीवन के संघर्षों को साझा करते हुए पंत ने बताया कि वे महज 13 वर्ष की उम्र में 1949 के संघ सत्याग्रह के दौरान गिरफ्तार हुए थे। दो महीने की सजा सुनाई गई, हालांकि कुछ ही घंटों बाद रिहाई के आदेश आ गए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सक्रियता उनके जीवन का हिस्सा बहुत कम उम्र से रही है।
पत्रकारिता और साहित्य में दशकों का योगदान
कैलाश चंद्र पंत ने पत्रकारिता में कई ऐतिहासिक विशेषांक प्रकाशित किए, जिनमें मालवा, बुंदेलखंड, छत्तीसगढ़, शंकराचार्य और तंत्र-मंत्र विशेषांक शामिल हैं। उन्होंने साहित्यिक पत्रिकाओं ‘जनधर्म’, ‘अक्षरा’ सहित कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं का संपादन किया और सकारात्मक सामाजिक चेतना को बढ़ावा दिया।
भगवानदास रैकवार: बुंदेली युद्ध कला के संरक्षक
सागर के भगवानदास रैकवार को राई नृत्य कला और बुंदेली पारंपरिक मार्शल आर्ट को जीवित रखने के लिए सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने दशकों तक युवाओं को प्रशिक्षण देकर इस विलुप्त होती कला को संरक्षित किया।

पद्मश्री से सम्मानित होंगी ये हस्तियां
- कैलाश चंद्र पंत – साहित्य और पत्रकारिता
- भगवानदास रैकवार – पारंपरिक मार्शल आर्ट और लोककला
- मोहन नागर – सामाजिक सेवा एवं जन अभियान
साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में खुशी
मध्यप्रदेश के साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र में पद्मश्री की इस घोषणा को लेकर उत्साह का माहौल है। विद्वानों का कहना है कि यह सम्मान प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला है।