सागर। गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में व्यस्त रहते हैं, वहीं सागर की पोद्दार कॉलोनी में आयोजित एक अनोखे समर कैंप ने बच्चों को रचनात्मकता और कला से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया। पांच दिवसीय निशुल्क समर कैंप में बच्चों ने न केवल नई-नई आर्ट एंड क्राफ्ट गतिविधियां सीखीं, बल्कि अपनी कल्पनाशक्ति और हुनर को भी खुलकर प्रदर्शित किया। कैंप में कुल 41 बच्चों ने भाग लिया और पूरे उत्साह के साथ हर गतिविधि में अपनी सहभागिता निभाई।
इस समर कैंप का आयोजन पोद्दार कॉलोनी में किया गया, जहां प्रतिदिन बच्चों के लिए अलग-अलग थीम और रचनात्मक गतिविधियां तय की गई थीं। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन से दूर कर कला, रचनात्मकता और सीखने वाली गतिविधियों की ओर प्रेरित करना था। आयोजकों का मानना है कि वर्तमान समय में बच्चों का अधिकतर समय मोबाइल, वीडियो गेम और सोशल मीडिया पर बीत रहा है, जिसका प्रभाव उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर पड़ रहा है। ऐसे में इस प्रकार के कैंप बच्चों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।

कैंप के पहले दिन बच्चों को पारंपरिक भारतीय लोक कला “वारली आर्ट” सिखाई गई। इस गतिविधि में बच्चों को महाराष्ट्र की प्रसिद्ध वारली चित्रकला की शैली से परिचित कराया गया। बच्चों ने सफेद रंग और सरल आकृतियों के माध्यम से गांव, प्रकृति, पेड़-पौधे और मानव जीवन से जुड़े सुंदर चित्र बनाए। प्रशिक्षकों ने बच्चों को बताया कि वारली आर्ट केवल चित्रकला नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और लोकजीवन की अभिव्यक्ति है। बच्चों ने बड़ी रुचि के साथ इस कला को सीखा और अपनी कल्पनाओं को कागज पर उतारा।
दूसरे दिन कैंप में ओरिगामी गतिविधि आयोजित की गई। इस दौरान बच्चों ने रंग-बिरंगे कागजों से विभिन्न आकृतियां बनाना सीखा। किसी ने पक्षी बनाए तो किसी ने फूल और सजावटी वस्तुएं तैयार कीं। ओरिगामी के माध्यम से बच्चों की एकाग्रता, धैर्य और हाथों की कार्यक्षमता को विकसित करने का प्रयास किया गया। बच्चों ने बेहद उत्साह के साथ इस गतिविधि में हिस्सा लिया और प्रशिक्षकों से नई-नई तकनीकें सीखीं।
तीसरे दिन लीफ आर्ट गतिविधि कराई गई, जिसमें बच्चों को पेड़ों की पत्तियों के माध्यम से कलात्मक डिजाइन बनाना सिखाया गया। बच्चों ने अलग-अलग आकार और रंग की पत्तियों का उपयोग कर सुंदर चित्र और सजावटी डिजाइन तैयार किए। इस गतिविधि के जरिए बच्चों को प्रकृति के महत्व और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। आयोजकों ने बच्चों को समझाया कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने और उसे समझने का भी तरीका है।
चौथे दिन पेपर कप क्राफ्ट गतिविधि आयोजित हुई। इसमें बच्चों ने साधारण पेपर कप का उपयोग कर विभिन्न सजावटी वस्तुएं तैयार कीं। किसी ने फूलदान बनाया तो किसी ने पेन स्टैंड और खिलौने तैयार किए। बच्चों ने बेकार समझी जाने वाली चीजों को उपयोगी और आकर्षक वस्तुओं में बदलने की कला सीखी। इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मक सोच और रिसाइक्लिंग के प्रति जागरूकता विकसित करना था।
कैंप के पांचवें और अंतिम दिन बच्चों को आइसक्रीम स्टिक क्राफ्ट सिखाया गया। बच्चों ने आइसक्रीम स्टिक की मदद से फोटो फ्रेम, छोटी झोपड़ियां, सजावटी वस्तुएं और अन्य क्राफ्ट आइटम तैयार किए। कैंप के अंतिम दिन बच्चों के चेहरे पर अलग ही उत्साह देखने को मिला। सभी बच्चों ने अपनी बनाई हुई कलाकृतियों का प्रदर्शन भी किया, जिसे अभिभावकों ने काफी सराहा।
कैंप के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को डिजिटल प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। बच्चों ने प्रमाणपत्र पाकर खुशी जाहिर की और कहा कि उन्हें इस कैंप में बहुत कुछ नया सीखने का अवसर मिला। कई बच्चों ने बताया कि उन्होंने पहली बार वारली आर्ट और ओरिगामी जैसी गतिविधियां कीं, जिससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
आयोजक श्रृद्धा वर्मा ने बताया कि इस कैंप का उद्देश्य बच्चों को स्क्रीन टाइम से दूर कर रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना था। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल और इंटरनेट पर बीत रहा है, जिससे उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। ऐसे कैंप बच्चों को नई चीजें सीखने, दोस्त बनाने और अपनी प्रतिभा को पहचानने का अवसर देते हैं।
अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। कला और क्राफ्ट गतिविधियों से बच्चों की कल्पनाशक्ति बढ़ती है और उनमें आत्मविश्वास विकसित होता है। साथ ही, बच्चों को समूह में कार्य करना और नई चीजें सीखना भी आता है।
पांच दिनों तक चले इस समर कैंप ने यह साबित कर दिया कि यदि बच्चों को सही दिशा और अवसर मिले तो वे अपनी रचनात्मकता से कुछ भी नया सीख सकते हैं। कला, प्रकृति और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ा यह आयोजन बच्चों के लिए यादगार अनुभव बन गया।