पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष हत्याकांड में नया मोड़: ग्रामीणों ने जताई बड़ी साजिश की आशंका, कई और लोगों को आरोपी बनाने की मांग !

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मध्यप्रदेश के दमोह जिले में दमोह-सागर मार्ग पर हुए पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष देवेंद्र राजपूत हत्याकांड को लेकर मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को बरमासा गांव के ग्रामीणों ने सीएसपी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और पुलिस जांच पर सवाल उठाए। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस फिलहाल केवल तीन आरोपियों तक जांच सीमित रखे हुए है, जबकि इस हत्या के पीछे एक बड़ी और सुनियोजित साजिश काम कर रही है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे षड्यंत्र की निष्पक्ष जांच कर सभी संदिग्ध लोगों को आरोपी बनाया जाए और मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए।

कई और लोगों की संलिप्तता का दावा

ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रमेश राजपूत, दुर्गेश, नरेश, धर्मवीर और रणवीर राजपूत इस हत्याकांड में शामिल हो सकते हैं।

ज्ञापन में दावा किया गया कि रमेश, वैभव और नरेश ने मिलकर हत्या की साजिश रची थी। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पूरी योजना बनाकर अंजाम दिया गया हत्याकांड है।

ग्रामीणों ने पुलिस से मांग की है कि सभी संदिग्धों की मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच की जाए। साथ ही घटना से जुड़े इलाके के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जाएं ताकि साजिश के सभी पहलुओं का खुलासा हो सके।

मुख्य आरोपी पर 27 से ज्यादा मामले दर्ज

ग्रामीणों ने ज्ञापन में मुख्य संदिग्ध रमेश राजपूत का गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड भी उजागर किया। उनका आरोप है कि रमेश एक शातिर अपराधी है और वह पहले से एक तिहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट चुका है।

इसके अलावा उसके खिलाफ 27 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में उसका लंबे समय से आतंक है और उसके सहयोगियों पर भी हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर अपराधों के कई मुकदमे चल रहे हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फरार आरोपी अभिषेक को भी आर्थिक मदद पहुंचाई जा रही है ताकि वह पुलिस गिरफ्त से बच सके।

अवैध कब्जों पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग

हत्याकांड के विरोध में ग्रामीणों ने आरोपियों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की मांग भी उठाई है। अधिवक्ता मनीष नगाइच और मुकेश पांडे ने आरोप लगाया कि संदिग्धों ने गांव की कीमती जमीनों और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे कर रखे हैं।

उन्होंने मांग की कि आरोपियों के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाए ताकि क्षेत्र में फैले भय और आतंक का अंत हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन लोगों के प्रभाव के कारण गांव के लोग भय के माहौल में जीवन जी रहे हैं।

ग्रामीणों में आक्रोश और भय का माहौल

देवेंद्र राजपूत की हत्या के बाद बरमासा और आसपास के गांवों में तनाव का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो अपराधियों के हौसले और बढ़ जाएंगे।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले में राजनीतिक या अन्य किसी प्रकार का दबाव न आने दिया जाए और सभी आरोपियों को कानून के दायरे में लाया जाए।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि पुलिस ने केवल कुछ लोगों को गिरफ्तार कर मामले को बंद करने की कोशिश की, तो असली साजिशकर्ता बच सकते हैं।

पुलिस का बयान: वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी

मामले में एचआर पांडे ने कहा कि पुलिस अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और अन्य पहलुओं की जांच जारी है।

उन्होंने बताया कि पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो आरोपियों की संख्या बढ़ाई जाएगी और उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सीएसपी ने यह भी कहा कि पुलिस निष्पक्ष तरीके से जांच कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा

पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष की हत्या का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। क्षेत्र में इस घटना को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होंगे। वहीं प्रशासन पर पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर जनता का विश्वास बनाए रखने की जिम्मेदारी है।

अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी हुई है कि क्या इस मामले में वास्तव में कोई बड़ा षड्यंत्र सामने आता है या नहीं।

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