छतरपुर (मध्य प्रदेश)। वार्ड क्रमांक 17 स्थित बजरंगनगर कॉलोनी में भीषण गर्मी के बीच गंभीर जल संकट ने स्थानीय रहवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्थिति यह है कि नगर पालिका की मुख्य जलापूर्ति पाइपलाइन कॉलोनी से मात्र लगभग 100 मीटर की दूरी पर मौजूद है, लेकिन इस छोटे से अंतर को जोड़ने के लिए आवश्यक पाइपलाइन विस्तार अब तक पूरा नहीं किया गया है। इसके चलते कॉलोनी के करीब 10 से 15 घरों के लोग रोजाना पीने के पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि केवल 100 मीटर अतिरिक्त पाइपलाइन बिछा दी जाए तो पूरे क्षेत्र की जल समस्या स्थायी रूप से समाप्त हो सकती है। इसके बावजूद कई बार मांग उठाने और शिकायत करने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे लोगों में नगर पालिका और प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
कॉलोनीवासियों ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले 17 मार्च 2026 को नगर पालिका में लिखित आवेदन देकर समस्या के समाधान की मांग की थी। इसके बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 31 मार्च को कलेक्टर की जनसुनवाई में भी इस मुद्दे को उठाया गया। लेकिन ढाई महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
रहवासियों का कहना है कि वे नियमित रूप से नगर पालिका को भवन कर और अन्य सभी निर्धारित शुल्क समय पर जमा करते हैं, इसके बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है। लोगों ने सवाल उठाया है कि जब टैक्स समय पर लिया जा रहा है तो पानी जैसी बुनियादी जरूरत को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि समस्या को लेकर बार-बार शिकायतें की गईं, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं हुआ। गर्मी के इस मौसम में पानी की कमी से सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को हो रही है, जिन्हें दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है।
रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि 100 मीटर लंबी पाइपलाइन का विस्तार जल्द से जल्द कराया जाए, ताकि कॉलोनी में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित हो सके। साथ ही सभी पात्र परिवारों को वैध जल कनेक्शन देने की भी मांग की गई है, जिससे भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न उत्पन्न हो।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं किया गया तो वे आगे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल लोग कलेक्टर और नगर पालिका से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि भीषण गर्मी में उन्हें पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष न करना पड़े।