खजुराहो। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों उत्तराखंड के पवित्र बद्रीनाथ धाम की बर्फीली पहाड़ियों में 21 दिवसीय विशेष गुप्त साधना में लीन हैं। उनकी इस आध्यात्मिक साधना की शुरुआत 6 मई 2026 से हुई थी, जो 26 मई 2026 तक चलेगी। हिमालय की शांत और कठिन परिस्थितियों के बीच चल रही इस तपस्या को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह और श्रद्धा का माहौल है।
इन दिनों सोशल मीडिया पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वे अपनी कुटिया से बाहर निकलकर वहां तैनात भारतीय सेना के जवानों से मुलाकात और बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच सेना के जवानों के साथ उनकी यह मुलाकात चर्चा का विषय बनी हुई है।

बताया जा रहा है कि साधना के दौरान भी उन्होंने सेना के जवानों का उत्साह बढ़ाया और देश सेवा के लिए उनका आभार व्यक्त किया। वहीं जवानों ने भी बागेश्वर सरकार से आशीर्वाद लिया।
‘बद्रीनाथ एकात्म साधना’ में डूबे शास्त्री
जानकारी के अनुसार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ‘बद्रीनाथ एकात्म साधना’ के अंतर्गत भगवान विष्णु की आराधना और गहन ध्यान में लीन हैं। हिमालय की ऊंची चोटियों और कठिन मौसम के बीच की जा रही यह साधना बेहद विशेष मानी जा रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस प्रकार की तपस्या आत्मिक शांति, मन की एकाग्रता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। बर्फीले वातावरण में एकांत साधना को सनातन परंपरा में कठिन तप और साधना का स्वरूप माना जाता है।
बागेश्वर धाम से जुड़े श्रद्धालुओं का कहना है कि यह साधना केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति के लिए नहीं, बल्कि जनकल्याण और मानवता के हित के उद्देश्य से भी की जा रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं तस्वीरें
बर्फीले पहाड़ों के बीच साधना कर रहे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में वे साधारण वस्त्रों में नजर आ रहे हैं और आसपास बर्फ से ढके पहाड़ दिखाई दे रहे हैं।

श्रद्धालु इन तस्वीरों को आध्यात्मिक प्रेरणा के रूप में साझा कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे कठिन परिस्थितियों में सनातन साधना की मिसाल बताया है।
26 मई से करेंगे श्री सत्यनारायण कथा
बताया गया है कि 21 दिनों की यह विशेष साधना पूरी होने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 26 मई से 30 मई 2026 तक बद्रीनाथ धाम में श्री सत्यनारायण कथा करेंगे।
इस धार्मिक आयोजन में बागेश्वर धाम शिष्य मंडल के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। कथा कार्यक्रम को लेकर तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं।
श्रद्धालुओं में उत्साह
बागेश्वर धाम से जुड़े अनुयायियों और श्रद्धालुओं में इस साधना को लेकर विशेष उत्साह है। लोगों का मानना है कि हिमालय में की जा रही यह तपस्या आध्यात्मिक ऊर्जा और सनातन संस्कृति के प्रचार का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
धार्मिक जानकारों का कहना है कि हिमालय सदियों से ऋषि-मुनियों और संतों की तपोभूमि रहा है। ऐसे में बद्रीनाथ धाम में की जा रही यह साधना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।