भोपाल को मिला आधुनिक ‘अटल भवन’: 8 मंजिला नगर निगम मुख्यालय का CM मोहन यादव ने किया लोकार्पण, एक ही जगह मिलेंगी सभी नागरिक सुविधाएं !

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम का नया और आधुनिक मुख्यालय तैयार हो गया है। अटल भवन नाम से बने इस 8 मंजिला भवन का गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकार्पण किया। यह भवन तुलसी नगर सेकंड स्टॉप क्षेत्र में बनाया गया है और अब नगर निगम के लगभग सभी विभाग एक ही छत के नीचे संचालित होंगे।

इस नई बिल्डिंग को प्रदेश की पहली ऐसी नगरीय निकाय इमारत बताया जा रहा है, जो जियोथर्मल तकनीक और ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित है। भवन में आधुनिक सुविधाओं के साथ ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा गया है।

एक ही जगह होंगे नगर निगम के सभी काम

अब तक नागरिकों को नगर निगम से जुड़े अलग-अलग कार्यों के लिए शहर के कई हिस्सों में जाना पड़ता था, लेकिन अटल भवन के शुरू होने के बाद टैक्स, बिल्डिंग परमिशन, जलकार्य, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, विवाह पंजीकरण, सीवेज, स्वास्थ्य, राजस्व और अन्य सभी विभागों के काम एक ही परिसर में हो सकेंगे।

भवन के ग्राउंड फ्लोर पर जनसुविधा केंद्र बनाया गया है, जहां नागरिकों को सभी विभागों की जानकारी और सेवाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। इससे लोगों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

सोलर प्लांट और ग्रीन तकनीक से लैस

अटल भवन की सबसे बड़ी खासियत इसकी पर्यावरण अनुकूल तकनीक है। भवन परिसर की पार्किंग में लगाए गए सोलर पैनलों से लगभग 300 किलोवाट बिजली का उत्पादन होगा।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नीमच जिले में भोपाल नगर निगम द्वारा स्थापित 10.5 मेगावॉट क्षमता वाले सोलर प्रोजेक्ट का भी लोकार्पण किया।

नगर निगम के अनुसार यह भवन ऊर्जा बचत, प्राकृतिक रोशनी और ताप नियंत्रण जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं से लैस है।

कार्यक्रम में शामिल हुए कई नेता

लोकार्पण कार्यक्रम में प्रदेश सरकार और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इनमें प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप, मंत्री कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा, महापौर मालती राय सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम में नगर निगम के एमआईसी सदस्य, पार्षद और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।

लागत को लेकर उठे सवाल

हालांकि भवन के लोकार्पण के साथ इसकी लागत को लेकर नया विवाद भी सामने आ गया। इससे पहले निगम की बैठकों में इस भवन की लागत लगभग 43 करोड़ रुपए बताई गई थी, लेकिन लोकार्पण समारोह में महापौर मालती राय ने इसकी लागत 73 करोड़ रुपए बताई।

लागत में इस बड़े अंतर को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि आखिर परियोजना की लागत में इतना बड़ा बदलाव कैसे हुआ।

5 एकड़ क्षेत्र में बना विशाल भवन

करीब 5 एकड़ क्षेत्र में बने इस भवन में आधुनिक कार्यालय, बैठक कक्ष, डिजिटल सिस्टम और कर्मचारियों के लिए नई सुविधाएं विकसित की गई हैं।

भवन में बच्चों के लिए विशेष प्ले रूम और मेडिकल इमरजेंसी रूम भी बनाया गया है। इसके अलावा आम नागरिकों की सुविधा के लिए अलग सहायता केंद्र स्थापित किया गया है।

अभी शहर में अलग-अलग जगह चल रहे थे कार्यालय

अब तक नगर निगम की कई शाखाएं अलग-अलग स्थानों पर संचालित हो रही थीं। महापौर, निगम अध्यक्ष और कमिश्नर कार्यालय आईएसबीटी और माता मंदिर क्षेत्र में थे, जबकि बिल्डिंग परमिशन शाखा शाहपुरा और स्वास्थ्य विभाग फतेहगढ़ क्षेत्र में संचालित हो रहा था।

नई बिल्डिंग शुरू होने के बाद सभी शाखाओं को चरणबद्ध तरीके से यहां शिफ्ट किया जाएगा।

भवन में सामने आईं कुछ खामियां

हालांकि नई बिल्डिंग में कई कमियां भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी चूक मीटिंग हॉल को लेकर बताई जा रही है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद भवन में पर्याप्त मीटिंग हॉल की व्यवस्था नहीं की गई।

लोकार्पण समारोह में महापौर मालती राय ने मुख्यमंत्री से अतिरिक्त जमीन उपलब्ध कराने की मांग भी की।

किस मंजिल पर क्या रहेगा

  • ग्राउंड फ्लोर: जनसुविधा केंद्र, टैक्स काउंटर, विवाह पंजीकरण, बच्चों का गेम जोन
  • पहली से चौथी मंजिल: महापौर कार्यालय, एमआईसी, भवन अनुज्ञा, जलकार्य, सीवेज और राजस्व विभाग
  • पांचवीं से सातवीं मंजिल: स्वास्थ्य, आईटी, स्मार्ट सिटी, योजना और उद्यान विभाग
  • आठवीं मंजिल: निगम कमिश्नर कार्यालय और स्मार्ट सिटी मुख्यालय

तीन कमिश्नरों के कार्यकाल में पूरा हुआ निर्माण

नगर निगम मुख्यालय की डिजाइन तत्कालीन निगम कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी के कार्यकाल में तैयार की गई थी। भवन का बड़ा हिस्सा उनके समय में बना, जबकि शेष कार्य हरेंद्र नारायण के कार्यकाल में पूरा हुआ। अब कमिश्नर संस्कृति जैन के कार्यकाल में इसका औपचारिक लोकार्पण किया गया है।

अटल भवन को भोपाल नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे न केवल नागरिक सेवाएं आसान होंगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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