मध्यप्रदेश की राजधानी Bhopal में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। शहर की सिटी बस सेवा संचालित करने वाली संस्था बीसीएलएल (भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड) को अब राज्य सरकार की नई ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के अधीन कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद बस संचालन और प्रबंधन में राजनीतिक हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा और पूरी व्यवस्था प्रशासनिक अधिकारियों के नियंत्रण में आ जाएगी।
राज्य सरकार द्वारा जारी नई व्यवस्था के तहत अब बीसीएलएल का प्रभार महापौर या मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) के बजाय स्मार्ट सिटी सीईओ के पास रहेगा। फिलहाल स्मार्ट सिटी सीईओ अंजू अरुण इस व्यवस्था की प्रभारी बनी रहेंगी, जब तक कि नया कार्यकारी बोर्ड पूरी तरह गठित नहीं हो जाता। इस निर्णय को भोपाल की शहरी परिवहन व्यवस्था में बड़े सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब तक भोपाल सिटी बस सेवा में नगर निगम और जनप्रतिनिधियों का सीधा प्रभाव देखा जाता था। बस रूट तय करने, स्टॉपेज निर्धारित करने या नई बसों के संचालन जैसे फैसलों में पार्षदों और एमआईसी सदस्यों की सिफारिशें प्रभाव डालती थीं। कई बार राजनीतिक दबाव के कारण व्यावहारिक जरूरतों की बजाय क्षेत्रीय राजनीति के आधार पर निर्णय लिए जाते थे, जिससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब ऐसे फैसले पूरी तरह प्रशासनिक और तकनीकी आधार पर लिए जाएंगे।

राज्य सरकार की नई ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ नीति के तहत पूरे मध्यप्रदेश को सात परिवहन जोनों में बांटा गया है। भोपाल जोन में Narmadapuram संभाग को भी शामिल किया गया है। इस जोन के अंतर्गत आने वाले जिलों के कलेक्टर परिवहन बोर्ड का हिस्सा होंगे और वही बस सेवाओं के संचालन, रूट निर्धारण और मॉनिटरिंग का कार्य देखेंगे। इससे क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
नई व्यवस्था के तहत भोपाल क्षेत्रीय कंपनी अब यह तय करेगी कि किन रूटों पर कितनी बसें चलाई जाएंगी, किस इलाके में नई बस सेवा की जरूरत है और कहां बस स्टॉप बनाए जाएंगे। किराया निर्धारण और परमिट से जुड़ी प्रक्रिया भी इसी कंपनी के अधीन होगी। इससे नगर निगम पर निर्भरता कम होगी और फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।
सरकार का दावा है कि इस बदलाव से शहर की बस सेवा अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। वर्तमान में भोपाल सिटी बस सेवा को लेकर यात्रियों की कई शिकायतें सामने आती रही हैं। बसों का समय पर नहीं पहुंचना, चालकों और परिचालकों की मनमानी, बसों की खराब स्थिति और रूट प्रबंधन में अव्यवस्था जैसी समस्याएं आम हो चुकी थीं। अब इन समस्याओं को दूर करने के लिए बस सेवा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा।
बीसीएलएल की बसों में जल्द ही इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लागू किया जाएगा। इसके जरिए बसों की लाइव ट्रैकिंग की जा सकेगी और मुख्यालय से ही पूरी निगरानी रखी जाएगी। इससे यात्रियों को बसों की वास्तविक लोकेशन की जानकारी मिल सकेगी और संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों या ऑपरेटरों पर तत्काल कार्रवाई भी संभव हो सकेगी।
योजना के पहले चरण में भोपाल क्लस्टर के अंतर्गत 104 मार्गों पर कुल 398 बसें चलाने की योजना तैयार की गई है। ये बसें केवल भोपाल शहर तक सीमित नहीं रहेंगी बल्कि उपनगरीय क्षेत्रों और नर्मदापुरम संभाग के प्रमुख मार्गों को भी जोड़ेंगी। इससे रोजाना यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार खुद बसें खरीदने के बजाय पीपीपी मॉडल यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत निजी ऑपरेटरों के माध्यम से इन बसों का संचालन कराएगी। इससे नगर निगम पर वित्तीय बोझ कम होगा और संचालन अधिक व्यावसायिक तरीके से किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि एक समय भोपाल की सड़कों पर साढ़े तीन सौ से अधिक सिटी बसें चलती थीं, लेकिन समय के साथ इनकी संख्या लगातार घटती गई। वर्तमान में शहर में केवल लगभग 70 बसें ही संचालित हो रही हैं। बसों की कमी के कारण लोगों की निर्भरता ऑटो, टैक्सी और निजी वाहनों पर बढ़ गई है, जिससे यातायात दबाव और प्रदूषण दोनों में वृद्धि हुई है।
नई परिवहन नीति को लेकर प्रशासन का मानना है कि यदि योजना सफल रही तो भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। वहीं आम नागरिकों को उम्मीद है कि लंबे समय से अव्यवस्था और राजनीतिक हस्तक्षेप से जूझ रही सिटी बस सेवा अब अधिक व्यवस्थित, समयबद्ध और यात्री हितैषी बन सकेगी।