मध्यप्रदेश: डिफेंस और एयरोस्पेस निर्माण का नया हब बनने की ओर :

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रक्षा उत्पादन विभाग, भारत सरकार की संयुक्त सचिव डॉ. गरिमा भगत ने शुक्रवार को कहा कि मध्यप्रदेश में रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण का हब बनने की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश का औद्योगिक ढांचा, भौगोलिक स्थिति और नीतिगत प्रोत्साहन इसे रक्षा उत्पादन क्षेत्र में निवेश के लिए सबसे उपयुक्त गंतव्य बनाते हैं।

जबलपुर में आयोजित रक्षा उद्योग इंटरेक्शन प्रोग्राम में उन्होंने कहा कि भारत सरकार का प्रयास है कि MSME और स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में सशक्त भागीदारी दी जाए। उद्योग, अकादमिक संस्थान और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग से ही आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा क्षेत्र में नवाचार को गति मिलेगी।


जबलपुर में 300 करोड़ की एमआरओ सुविधा

डॉ. भगत ने बताया कि जबलपुर में 300 करोड़ की लागत से मैन्युफैक्चरिंग, रिपेयर एंड ओवरहाल (MRO) सुविधा स्थापित की जा रही है।

  • यह परियोजना स्थानीय उद्योगों और युवाओं के लिए बड़े अवसर खोलेगी।
  • रोजगार सृजन के साथ-साथ प्रदेश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी।

MSME और स्टार्टअप को सीधा फायदा

संयुक्त सचिव ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम MSME को रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) और बड़े निजी क्षेत्र से जोड़ते हैं।

  • टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट वेंचर और सह-विकास की संभावनाएं बढ़ती हैं।
  • SRIJAN पोर्टल पर अब तक 39 हजार से अधिक प्रोडक्ट स्वदेशीकरण के लिए सूचीबद्ध हैं।
  • यह छोटे उद्योगों और स्टार्टअप के लिए बड़े निवेश और उत्पादन के अवसर तैयार कर रहा है।

प्रदेश का मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम

कार्यक्रम में जबलपुर के रक्षा उद्योग के मजबूत वेंडर बेस और ईकोसिस्टम पर विशेष चर्चा हुई।

  • औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और अनुकूल औद्योगिक वातावरण के कारण रक्षा उत्पादन का हब बनने के लिए उपयुक्त है।
  • प्रदेश में ऑटो क्लस्टर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, तकनीकी वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर तेजी से विकसित हो रहे हैं, जो रक्षा उद्योग की जरूरतों को पूरा करेंगे।

एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी 2025 का असर

राज्य सरकार की एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी 2025 के अंतर्गत:

  • भूमि रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है।
  • पूंजीगत निवेश पर 40 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।
  • R&D, टेस्टिंग और अन्य सुविधाओं पर विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

इन नीतियों से निजी निवेशक और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां मध्यप्रदेश की ओर आकर्षित हो रही हैं।


देश की अग्रणी कंपनियों की मौजूदगी

इस कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें रक्षा PSU, निजी क्षेत्र, MSME, स्टार्टअप, शिक्षाविद और शोध संस्थान शामिल थे।

  • अदाणी डिफेंस, बीईएल, हिंदुस्तान शिपयार्ड, गन कैरिज फैक्ट्री, ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज, फोर्स मोटर्स, एचईजी, जेबीएम, विनायक इंजीनियरिंग, सीआईपीईटी भोपाल, IISER भोपाल और CSIR-AMPRI जैसी अग्रणी इकाइयां भी शामिल रहीं।

आयुक्त MSME का दृष्टिकोण

एमएसएमई आयुक्त प्रीति मैथिल ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में छोटे उद्योगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। यदि MSME को समय पर तकनीकी और वित्तीय सहयोग मिले तो वे रक्षा उद्योग में गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।

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