मध्यप्रदेश में डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों की मेहनत की कमाई मिनटों में उड़ा रहे हैं। बीते दो साल में प्रदेश में साइबर फ्रॉड के 992 मामले सामने आए हैं, जिनमें लगभग 152 करोड़ रुपए की भारी-भरकम ठगी हुई है। यह जानकारी विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के उत्तर में गृह विभाग ने दी।

ठगी की रकम में 80% की बढ़ोतरी
गृह विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में ऑनलाइन ठगी के भोपाल में 53 और इंदौर में 184 मामले दर्ज हुए। पूरे प्रदेश में इस साल कुल 444 मामलों में 19 करोड़ रुपए की ठगी हुई।
लेकिन वर्ष 2024 में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा।
- 2024 में प्रदेश में 521 मामले सामने आए।
- ठगी की राशि बढ़कर 94 करोड़ रुपए हो गई।
यानी एक साल में मामलों में 20% की बढ़ोतरी हुई, जबकि ठगी की रकम पांच गुना अधिक बढ़ी। यह साइबर अपराधियों की बढ़ती सक्रियता और उनकी नई तकनीकों का संकेत है।

डिजिटल अरेस्ट: 2023 में 1, 2024 में 26 केस
डिजिटल अरेस्ट के मामलों में भी गंभीर उछाल दर्ज किया गया है।
- 2023 में केवल 1 मामला सामने आया था, जिसमें 96,968 रुपए की ठगी हुई थी।
- 2024 में ऐसे 26 केस दर्ज हुए, जिनमें कुल 12 करोड़ 60 लाख 71 हजार 802 रुपए की धोखाधड़ी हुई।
इन मामलों में कॉल पर खुद को पुलिस, CBI, आयकर, कस्टम या बैंक अधिकारी बताकर लोगों को डराया गया और उनसे पैसे ट्रांसफर करवाए गए।


510 साइबर अपराधी गिरफ्तार, 18 करोड़ की रकम जब्त
गृह विभाग के अनुसार 2023 और 2024 में ऑनलाइन ठगी के 965 मामलों में 138 करोड़ रुपए और डिजिटल अरेस्ट के 27 मामलों में 14 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई।
पुलिस ने—
- 510 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया
- 18 करोड़ रुपए की राशि जब्त की
- कई मामलों में पीड़ितों को वापस रकम भी लौटाई गई
अधिकांश अपराधी खुद को बैंक, पुलिस, आयकर विभाग, CBI, कस्टम और TRAI का अधिकारी बताकर लोगों को झांसा देते थे।
राजस्थान से केरल तक फैला ठगों का नेटवर्क
साल 2024 में भोपाल साइबर पुलिस हेड क्वार्टर में 9 डिजिटल अरेस्ट मामले दर्ज हुए।
इनमें 3 करोड़ 4 लाख 77 हजार 626 रुपए की ठगी की गई थी।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए—
- दौसा (राजस्थान), डीडवाना (राजस्थान), ग्वालियर, नीमच, देवास, मंदसौर सहित कई जगहों से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
- पीड़ितों को 14 लाख 33 हजार 720 रुपए की राशि वापस दिलाई।
साइबर ठगी का यह नेटवर्क राजस्थान से लेकर केरल तक फैला हुआ पाया गया है।
सावधान रहें, जागरूक रहें
सरकार और पुलिस लगातार अलर्ट जारी कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है।
- कोई भी अधिकारी फोन पर पैसे ट्रांसफर करने या OTP पूछने की मांग नहीं करता।
- किसी अनजान लिंक, ऐप या कॉल पर भरोसा न करें।
मध्यप्रदेश में साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या यह बताती है कि डिजिटल दुनिया जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही जोखिम भरी भी। अगर आप चाहें तो मैं इस विषय पर टीवी बाइट/एंकर स्क्रिप्ट या इंफोग्राफिक टेक्स्ट भी तैयार कर सकता हूं।