भोपाल,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरीय निकाय चुनावों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। आयोग ने वर्ष 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में निर्धारित समय पर चुनाव खर्च का ब्यौरा प्रस्तुत नहीं करने वाले 28 पार्षद उम्मीदवारों को वर्ष 2027 में होने वाले आगामी चुनावों के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है।
आयोग के अनुसार जिन उम्मीदवारों ने चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर अपने खर्च का विवरण और ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं की, उन्हें दो वर्षों के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। इतना ही नहीं, यदि इन अयोग्य घोषित व्यक्तियों में से कोई वर्तमान में पार्षद के पद पर है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
इसके अलावा, आयोग ने उन उम्मीदवारों पर भी कार्रवाई की है जिन्होंने चुनावी खर्च के दौरान निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया। जिन प्रत्याशियों ने 5 हजार रुपए से अधिक का भुगतान नकद में किया, उन्हें भी एक वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, भले ही उन्होंने अपना खर्च विवरण जमा किया हो।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2022 से पार्षद चुनाव में भी सांसद और विधायकों की तरह खर्च का पूरा ब्यौरा देना अनिवार्य किया गया था। इसके तहत हर प्रत्याशी को परिणाम के 30 दिनों के भीतर अपने सभी खर्चों का हिसाब आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना होता है। साथ ही, 5 हजार रुपए से अधिक का नकद लेन-देन प्रतिबंधित किया गया है, ताकि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
अयोग्य घोषित किए गए उम्मीदवारों में विदिशा, गंजबासौदा, लटेरी और कुरवाई नगर निकायों के प्रत्याशी शामिल हैं। इनमें विदिशा नगरपालिका परिषद से 3, गंजबासौदा से 6, लटेरी से 4 और कुरवाई से 15 अभ्यर्थियों को अयोग्य ठहराया गया है।

आयोग की इस कार्रवाई को आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि चुनावी नियमों के उल्लंघन को अब किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्ती से चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। साथ ही, यह कदम उन उम्मीदवारों के लिए चेतावनी भी है जो नियमों की अनदेखी करते हैं।
आयोग की इस पहल से यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में चुनावी व्यवस्थाओं को और अधिक सख्त और व्यवस्थित बनाया जाएगा, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मजबूत हो सके।