Madhya Pradesh में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल कंपनियों द्वारा 11 दिनों के भीतर चौथी बार ईंधन के दाम बढ़ाए जाने से आम नागरिकों, किसानों और मध्यम वर्ग की चिंता बढ़ गई है। नई दरें लागू होने के बाद कई जिलों में डीजल 100 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गया है, जबकि पेट्रोल की कीमत 116 रुपए या उससे अधिक हो गई है।
जानकारी के अनुसार 25 मई को पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई। मध्य प्रदेश के कुछ शहरों में यह बढ़ोतरी लगभग 3 रुपए प्रति लीटर तक दर्ज की गई है। लगातार हो रही मूल्य वृद्धि के कारण बीते कुछ दिनों में ईंधन की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 8 रुपए प्रति लीटर तक का इजाफा हो चुका है।
Sagar में पेट्रोल की कीमत 114.55 रुपए प्रति लीटर और डीजल 99.63 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। वहीं राज्य के कई अन्य हिस्सों में डीजल ने 100 रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। लगातार बढ़ती कीमतों ने परिवहन, खेती-किसानी और घरेलू बजट पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है।

Bina में भी पेट्रोल पंपों पर लोगों के बीच बढ़ती कीमतों को लेकर चर्चा होती रही। वाहन चालकों और उपभोक्ताओं ने महंगाई पर चिंता जताते हुए कहा कि लगातार बढ़ रहे ईंधन के दामों का असर हर वर्ग पर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुएं भी महंगी होती जा रही हैं।
पूर्व प्राचार्य अशोक परिहार ने कहा कि महज 10 दिनों के भीतर चार बार कीमतों में वृद्धि होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर मजदूर, नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ेगा। पहले से बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि से लोगों का मासिक बजट बिगड़ रहा है।
ग्राम हिगटी के किसान चंद्रभान सिंह ने कहा कि डीजल की कीमत बढ़ने का सीधा असर खेती पर पड़ता है। खेतों में ट्रैक्टर, पंप और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन के लिए डीजल की जरूरत होती है। ऐसे में डीजल महंगा होने से खेती की लागत बढ़ जाएगी और किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
युवा गौरव शर्मा ने भी किसानों की समस्याओं को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले ही किसान मौसम और लागत की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम खेती को और कठिन बना देंगे। उन्होंने कहा कि इसका असर खाद्यान्न की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

निकिता बडोनिया ने कहा कि ईंधन महंगा होने से केवल परिवहन ही नहीं बल्कि घर चलाना भी मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ने के साथ-साथ खाने-पीने की वस्तुओं, सब्जियों और अन्य जरूरी सामानों के दाम भी बढ़ जाते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन लागत बढ़ने के कारण बाजार में लगभग सभी वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाद्य सामग्री, निर्माण सामग्री और अन्य उपभोक्ता वस्तुएं भी महंगी हो जाती हैं।
लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों ने सरकार से राहत देने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नियंत्रण जरूरी है, ताकि महंगाई पर भी अंकुश लगाया जा सके। कई लोगों ने टैक्स में कमी कर आम जनता को राहत देने की आवश्यकता बताई।
पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों के बीच यही चर्चा रही कि यदि इसी तरह कीमतें बढ़ती रहीं तो आने वाले दिनों में आम आदमी के लिए वाहन चलाना और रोजमर्रा का खर्च उठाना और अधिक कठिन हो जाएगा।