महू में नर्मदा जल सप्लाई पर मंडरा रहा खतरा, गंदी नालियों से गुजर रहीं पाइपलाइनें, भागीरथपुरा जैसी त्रासदी की आशंका !

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महू। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत के बाद पूरे संभाग में पेयजल व्यवस्था को लेकर चिंता गहरा गई है। इसी बीच महू शहर से सामने आई हकीकत ने हालात को और भयावह बना दिया है। यहां नर्मदा जल सप्लाई की पाइपलाइनें गंदी नालियों के भीतर से होकर गुजर रही हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता है।

दैनिक भास्कर महू की टीम ने जब शहर के विभिन्न इलाकों का दौरा किया तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। नर्मदा का शुद्ध पेयजल, जो लोगों के घरों तक पहुंचना चाहिए, वह खुले नालों और गंदगी के बीच से होकर सप्लाई किया जा रहा है। कई जगह तो लोगों ने नालियों में डूबी इन पाइपलाइनों से सीधे अपने घरों के लिए नल कनेक्शन ले रखे हैं।

लीकेज हुआ तो फैल सकता है संक्रमण

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन पुरानी पाइपलाइनों में कहीं भी लीकेज होता है, तो नालियों का गंदा और संक्रमित पानी सीधे पीने के पानी में मिल सकता है। ऐसी स्थिति में महू को भी भागीरथपुरा जैसी भयावह त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है, जहां दूषित पानी ने कई लोगों की जान ले ली थी।

रोजाना 5 लाख गैलन नर्मदा जल की सप्लाई

छावनी परिषद (कैंटोनमेंट बोर्ड) महू द्वारा शहर के कई इलाकों में रोजाना करीब 5 लाख गैलन नर्मदा जल की सप्लाई की जाती है। यह पानी पहले कोतवाली चौक स्थित पानी की टंकी में संग्रहित किया जाता है। इसके बाद यहीं से शहर के अलग-अलग हिस्सों में वितरण किया जाता है।

समस्या यह है कि टंकी से निकलने के बाद यही पानी गंदी नालियों में बिछी पुरानी पाइपलाइनों के जरिए लोगों के घरों तक पहुंचता है, जिससे इसकी शुद्धता पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।

ब्रिटिश काल की पाइपलाइनें, सिर्फ मरम्मत के सहारे व्यवस्था

स्थानीय रहवासियों के मुताबिक, इन क्षेत्रों में बिछी कई पाइपलाइनें ब्रिटिश शासनकाल की हैं। दशकों पुरानी इन लाइनों को बदला नहीं गया, बल्कि केवल जरूरत पड़ने पर मरम्मत कर दी जाती है। नालियों में गंदगी, कीचड़ और कचरे का अंबार लगा रहता है, जिसके बीच से ये पाइपलाइनें गुजर रही हैं।

शहर के मोती चौक, छोटा बाजार, फूल चौक, मार्केट चौक, संगी स्ट्रीट, मेन स्ट्रीट, मानक चौक, लुनियापुरा, राजमोहल्ला और गोकुलगंज जैसे प्रमुख इलाकों में यह स्थिति खुले तौर पर देखी जा सकती है।

सिटी इंजीनियर का जवाब

इस पूरे मामले पर जब छावनी परिषद के सिटी इंजीनियर हरिशंकर कोलाय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि परिषद रोजाना 5 लाख गैलन पानी की सप्लाई कर रही है और कोतवाली चौक स्थित पानी की टंकी को हर छह महीने में साफ किया जाता है।

नालियों में बिछी पाइपलाइनों के सवाल पर उन्होंने कहा कि कई बार सड़क निर्माण के दौरान लोगों को नई लाइन से कनेक्शन लेने के लिए कहा जाता है, लेकिन कनेक्शन चार्ज के डर से लोग ऐसा नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि जैसे ही लीकेज की शिकायत मिलती है, टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर मरम्मत कर देती है।

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी, रहवासियों में आक्रोश

स्थानीय लोगों का आरोप है कि महू के जनप्रतिनिधियों ने सड़क और पुलिया निर्माण पर तो ध्यान दिया, लेकिन नालियों के बीच से गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों को हमेशा नजरअंदाज किया। भागीरथपुरा हादसे के बाद यह साफ हो गया है कि महू के लोग भी अनजाने में मौत के साए में जी रहे हैं।

रहवासी हंसराज वर्मा और उर्मिला कौशल का कहना है कि कई बार नलों से बदबूदार और गंदा पानी आता है। इस संबंध में अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि अधिकारी कुंभकरण की नींद सोए हुए हैं और किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।

डर के साए में महू

शहरवासियों को आशंका है कि यदि समय रहते पाइपलाइन व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो महू भी किसी दिन भागीरथपुरा जैसी घटना का शिकार हो सकता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नालियों में बिछी पुरानी पाइपलाइनों को तत्काल हटाकर सुरक्षित और आधुनिक व्यवस्था की जाए, ताकि शुद्ध पेयजल मिल सके और किसी बड़ी त्रासदी से बचा जा सके।

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