सागर। जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा परिणाममूलक बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रतिभा पाल ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अब केवल कार्यालयों में बैठकर समीक्षा करने के बजाय सीधे ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करें।
कलेक्टर के निर्देशानुसार अब प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को आयोजित होने वाले ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHND) सत्रों में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) तथा जिला कार्यक्रम इकाई के अधिकारी स्वयं उपस्थित रहेंगे। इस दौरान वे केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं करेंगे, बल्कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों की पहचान कर उनके निराकरण की दिशा में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत जानेंगे अधिकारी
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने स्पष्ट किया है कि वीएचएनडी सत्रों में अधिकारियों की उपस्थिति का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को समझना है। इसके लिए अधिकारियों को गैप आईडेंटिफिकेशन यानी सेवाओं में मौजूद कमियों और उनके कारणों की पहचान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

उन्होंने कहा कि कई बार योजनाएं और व्यवस्थाएं कागजों पर तो पूरी दिखाई देती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर लाभार्थियों तक उनका पूरा लाभ नहीं पहुंच पाता। ऐसी स्थिति में अधिकारियों की प्रत्यक्ष मौजूदगी से समस्याओं की सही जानकारी प्राप्त होगी और समाधान भी तेजी से हो सकेगा।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मिलेगा सीधा लाभ
वीएचएनडी सत्रों का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों को स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं उपलब्ध कराना है। इन सत्रों में टीकाकरण, प्रसव पूर्व जांच, पोषण परामर्श, एनीमिया जांच, बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण तथा विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी जाती है।
कलेक्टर ने कहा कि यदि किसी गांव या आंगनबाड़ी केंद्र में टीकों की कमी, पोषण आहार की अनुपलब्धता, स्वास्थ्य उपकरणों की कमी या अन्य कोई समस्या पाई जाती है तो उसका तत्काल निराकरण किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और लाभार्थियों को समय पर सेवाएं मिल सकेंगी।
गैप आईडेंटिफिकेशन पर रहेगा विशेष फोकस
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे निरीक्षण के दौरान केवल समस्याओं को दर्ज न करें बल्कि उनके मूल कारणों की भी पहचान करें। यदि कहीं स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है, लॉजिस्टिक सपोर्ट पर्याप्त नहीं है, दवाओं की उपलब्धता प्रभावित है या भवन संबंधी समस्याएं हैं तो उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर समाधान की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में छोटे-छोटे अंतर भी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए प्रत्येक कमी की पहचान और उसका समयबद्ध निराकरण आवश्यक है।
मंगलवार और शुक्रवार को फील्ड में रहेंगे अधिकारी
कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि यदि कोई अत्यंत आवश्यक बैठक या प्रशासनिक कार्यक्रम निर्धारित न हो तो प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बीएमओ तथा संबंधित स्वास्थ्य अमला वीएचएनडी सत्रों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेगा।
इन सत्रों के दौरान अधिकारियों को लाभार्थियों से सीधे संवाद स्थापित करने, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।
टीकाकरण और संस्थागत प्रसव को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकारियों की प्रत्यक्ष निगरानी से टीकाकरण अभियान और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलेगा। कई ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी या अन्य कारणों से कुछ लाभार्थी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रह जाते हैं। ऐसे मामलों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ा जा सकेगा।

इसके अलावा गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान और समय पर उपचार की व्यवस्था भी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
पोषण योजनाओं की होगी बेहतर मॉनिटरिंग
वीएचएनडी सत्रों में पोषण संबंधी गतिविधियों की भी समीक्षा की जाएगी। कुपोषण से प्रभावित बच्चों और एनीमिया से ग्रसित महिलाओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
कलेक्टर ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग को जमीनी स्तर पर अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाया जा रहा है।
पारदर्शी और परिणाममूलक व्यवस्था की दिशा में पहल
कलेक्टर प्रतिभा पाल का यह निर्णय स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शी मॉनिटरिंग और प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे अधिकारियों को सीधे फील्ड स्तर की चुनौतियों को समझने का अवसर मिलेगा और योजनाओं के बेहतर संचालन में सहायता मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और प्रत्यक्ष मॉनिटरिंग से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार होगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
जिला प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी गर्भवती महिला या बच्चा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।