मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना बनी बेटियों का सहारा !

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मध्यप्रदेश में सामाजिक समरसता और विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रमों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मोहन यादव द्वारा उज्जैन में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 112 नवदंपत्तियों का सामूहिक विवाह संपन्न हुआ, जिसने सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को और मजबूत किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि सामूहिक विवाह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में समानता, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देने का माध्यम है। उन्होंने विवाह संस्कार को जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यह दो परिवारों को जोड़ने का पवित्र अवसर होता है। जब यह आयोजन सामूहिक रूप से होता है, तो समाज में भेदभाव कम होता है और समरसता की भावना प्रबल होती है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना आज प्रदेश की लाखों बेटियों के लिए वरदान साबित हो रही है। 13 दिसंबर 2023 से 31 जनवरी 2026 तक इस योजना के अंतर्गत 1 लाख 57 हजार 769 विवाह संपन्न कराए गए हैं, जिन पर लगभग 867 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई है। यह आंकड़ा इस योजना की व्यापकता और प्रभावशीलता को दर्शाता है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों के लिए यह योजना अत्यंत सहायक सिद्ध हो रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल सामाजिक संदेश ही नहीं दिया, बल्कि विकास कार्यों की भी बड़ी सौगात दी। लगभग 58 करोड़ रुपये की लागत से सात महत्वपूर्ण विकास कार्यों का भूमि पूजन किया गया। ये सभी कार्य आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

इन विकास कार्यों में हरसिद्धि पाल से रामघाट मार्ग का चौड़ीकरण, श्री महाकाल लोक में शेड निर्माण, नीलगंगा सरोवर और सोलह सागर का पुनर्जीवन, कालिदास उद्यान का आधुनिकीकरण, विक्रम कीर्ति संग्रहालय का उन्नयन और बांगड़ भवन को मुद्रा संग्रहालय के रूप में विकसित करना शामिल है। ये सभी परियोजनाएं न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देंगी, बल्कि शहर की आधारभूत संरचना को भी मजबूत करेंगी।

महाकाल लोक और रामघाट जैसे प्रमुख स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए जा रहे कार्य विशेष महत्व रखते हैं। इन परियोजनाओं से न केवल भीड़ प्रबंधन आसान होगा, बल्कि श्रद्धालुओं को एक सुखद और व्यवस्थित अनुभव भी मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए नए हेलीपैड और एयरपोर्ट का निर्माण भी किया जा रहा है। इससे आने वाले लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा होगी। साथ ही प्रशासन को भी आयोजन के दौरान बेहतर प्रबंधन करने में सहायता मिलेगी।

प्रदेश में धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए “पीएम श्री हेली पर्यटन सेवा” की शुरुआत भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सेवा के माध्यम से ओरछा, चंदेरी, इंदौर, उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ा गया है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

नीलगंगा सरोवर और सोलह सागर जैसे जल स्रोतों का पुनर्जीवन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। इससे न केवल जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि शहर को एक स्वच्छ और सुंदर सार्वजनिक स्थल भी मिलेगा। वहीं कालिदास उद्यान का विकास नागरिकों के लिए एक आकर्षक और आधुनिक मनोरंजन स्थल के रूप में उभरेगा।

कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधियों, संतों और बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया। नवविवाहित जोड़ों और उनके परिवारों के चेहरों पर खुशी इस बात का प्रमाण थी कि यह योजना उनके जीवन में कितना महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है।

अंततः, यह कहा जा सकता है कि सामूहिक विवाह जैसे सामाजिक आयोजन और विकास योजनाओं का यह समन्वय मध्यप्रदेश को प्रगति और समरसता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश न केवल सामाजिक रूप से सशक्त हो रहा है, बल्कि विकास के नए आयाम भी स्थापित कर रहा है।

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