भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ते ऊर्जा संकट को ध्यान में रखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के आह्वान पर मुख्यमंत्री ने अपने कारकेड में शामिल वाहनों की संख्या कम करने का फैसला किया है। अब आगामी आदेश तक मुख्यमंत्री के काफिले में 13 की जगह केवल 8 वाहन ही चलेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को आयोजित राज्य मंत्री परिषद की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पेट्रोल और डीजल की बचत राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने मंत्री परिषद के सभी सदस्यों से राष्ट्रहित में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने और शासकीय कार्यों में मितव्ययता अपनाने की अपील की।

वाहन रैली पर भी रोक
राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री के भ्रमण के दौरान अब वाहन रैली आयोजित नहीं की जाएगी। इसके साथ ही मंत्रियों को भी यात्रा के दौरान न्यूनतम वाहनों के उपयोग के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने नव नियुक्त निगम-मंडल के पदाधिकारियों को भी सादगी से कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश जारी किए हैं। स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पदभार ग्रहण कार्यक्रमों में अनावश्यक भीड़ और वाहन रैली से बचा जाए।
ऊर्जा बचत को लेकर सरकार गंभीर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए सुझावों को गंभीरता से लागू करेगी। उन्होंने अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से अपील की कि वे निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करें और जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।
सरकार का मानना है कि यदि समाज का हर वर्ग थोड़ी जिम्मेदारी निभाए तो ईंधन की बड़ी बचत संभव है। इससे न केवल आर्थिक बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
जनता के लिए संदेश
मुख्यमंत्री के इस फैसले को सादगी और जिम्मेदारी का संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अक्सर वीआईपी संस्कृति और बड़े कारकेड को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करेंगे तो आम लोगों में भी ईंधन बचत और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।