सागर जिले के गोपालगंज निवासी हिमांशु करोसिया ने जन्म से मूक-बधिर होने के बावजूद हिम्मत, मेहनत और विश्वास के दम पर यह साबित कर दिया कि सफलता शारीरिक सीमाओं से नहीं, बल्कि इरादों की मजबूती से मिलती है। जीवन की चुनौतियों से जूझते हुए भी हिमांशु अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे, और आखिरकार कलेक्टर श्री संदीप जी आर की पहल से उनका सपना अब हक़ीक़त बन चुका है।

लोन न मिलने से टूटा सपना—लेकिन हिमांशु नहीं टूटे
हिमांशु अपने परिवार के साथ पापड़ निर्माण का काम करते हैं और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत व्यवसाय को विस्तार देना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के कियोस्क के माध्यम से ऋण आवेदन जमा किया। सभी दस्तावेज पूरे होने के बावजूद बैंक ने यह कहते हुए लोन रोक दिया कि हिमांशु मूक-बधिर हैं, इसलिए वे व्यवसाय संभाल नहीं पाएंगे और ग्राहकों से संवाद में कठिनाई होगी।
यह निर्णय हिमांशु और परिवार के लिए गहरा आघात था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
जिला प्रशासन बना हिमांशु का सहारा
हिमांशु और परिवार ने मामले को जिला पंचायत के सीईओ तक पहुंचाया। सीईओ ने गंभीरता को समझते हुए प्रधानमंत्री सूक्ष्म उद्योग विभाग से विस्तृत जानकारी ली। विभाग की टीम ने स्थल निरीक्षण कर साफ कहा कि—
“मूक-बधिर होना लोन अस्वीकृति का आधार नहीं बन सकता, न ही इससे व्यवसाय करने की योग्यता प्रभावित होती है।”
इसके बाद प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और फाइल स्वीकृति के लिए भेजी।
कलेक्टर ने सौंपा 3 लाख का स्वीकृति पत्र
प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम यह रहा कि हिमांशु का लोन स्वीकृत हो गया। आज कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने स्वयं हिमांशु को ₹3,00,000 का स्वीकृति पत्र प्रदान किया। अब हिमांशु अपने पापड़ निर्माण कार्य को बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बना रहे हैं।
परिवार ने जताया आभार
लोन स्वीकृति के बाद हिमांशु और उनके परिजनों ने कलेक्टर एवं जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि—
“यदि प्रशासन का सहयोग न मिलता तो हमारा सपना अधूरा रह जाता। आज हिमांशु आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा सके हैं।”