सागर, प्रदेश में हाल ही में यात्री बसों में आग लगने की लगातार सामने आ रही घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सागर जिले में प्रशासन और परिवहन विभाग द्वारा बस संचालकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करना, अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम करना और बसों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराना रहा। अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यात्रियों की जान से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में जिले के विभिन्न बस ऑपरेटर, एसी और स्लीपर कोच बस संचालक, परिवहन विभाग के अधिकारी एवं संबंधित विभागों के कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने हाल के दिनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुई बस आगजनी की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकतर मामलों में तकनीकी लापरवाही, समय पर मेंटेनेंस न होना और सुरक्षा उपकरणों की कमी सामने आई है। इसी कारण अब प्रशासन ने बसों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्णय लिया है।

बैठक के दौरान विशेष रूप से एसी बसों की तकनीकी स्थिति पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि सभी एसी बस संचालक अपने वाहनों में लगे एसी सिस्टम की नियमित जांच कराएं। एसी यूनिट की प्रत्येक तीन माह में सर्विसिंग, साफ-सफाई और तकनीकी परीक्षण अनिवार्य रूप से कराया जाए। अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि एसी कम्प्रेसर में धूल-मिट्टी जमा होने या वायरिंग में खराबी आने से ओवरहीटिंग की स्थिति बनती है, जिससे शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
प्रशासन द्वारा सभी बसों में मानक स्तर के अग्निशमन यंत्र रखना अनिवार्य किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक बस में पर्याप्त संख्या में फायर एक्सटिंग्विशर उपलब्ध हों और उनकी समय-समय पर जांच भी कराई जाए। इसके साथ ही ड्राइवर और कंडक्टरों को अग्निशमन यंत्र चलाने का प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि दुर्घटना के शुरुआती क्षणों में यदि चालक दल प्रशिक्षित हो, तो बड़ी जनहानि को रोका जा सकता है।
बैठक में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (एफडीएसएस) लगाने को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों ने कहा कि सभी एसी बसों में एफडीएसएस सिस्टम लगाया जाना अनिवार्य होगा। यह सिस्टम बस में धुआं या आग की शुरुआती स्थिति को पहचानकर स्वतः अलर्ट देता है और आग को फैलने से रोकने में मदद करता है। प्रशासन का मानना है कि इस आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।
स्लीपर कोच बसों को लेकर भी प्रशासन ने गंभीर रुख अपनाया। बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी स्लीपर कोच बसों को एआईएस-119 मानकों के अनुरूप तैयार कराया जाए। अधिकारियों ने कहा कि इन मानकों के तहत बसों में इमरजेंसी एग्जिट, अग्निरोधक सामग्री, बेहतर वायरिंग सिस्टम और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था अनिवार्य होती है। नियमों का पालन नहीं करने वाली बसों के खिलाफ परिवहन विभाग द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि जिन बस संचालकों को पूर्व में सुरक्षा संबंधी कमियों को लेकर नोटिस जारी किए गए थे, उन्हें 25 मई 2026 तक अपने वाहनों का भौतिक सत्यापन क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय, सागर में कराना अनिवार्य होगा। सत्यापन के दौरान बसों की तकनीकी स्थिति, सुरक्षा उपकरण, फायर सिस्टम और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। निर्धारित समय सीमा तक सत्यापन नहीं कराने वाले संचालकों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
इसके अलावा अधिकारियों ने ड्राइवरों और कंडक्टरों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का सुझाव दिया, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति, तकनीकी खराबी या सुरक्षा निर्देशों की जानकारी तत्काल साझा की जा सके। अधिकारियों का कहना था कि आधुनिक संचार माध्यमों का उपयोग कर दुर्घटनाओं की स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाई जा सकती है और आवश्यक दिशा-निर्देश तुरंत उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
बैठक में बस संचालकों को यह भी निर्देशित किया गया कि वे नियमित रूप से अपने वाहनों की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि यात्री बसों में पेट्रोल, डीजल, केरोसिन या अन्य ज्वलनशील एवं विस्फोटक सामग्री का परिवहन किसी भी स्थिति में न किया जाए। अधिकारियों ने कहा कि कई बार अतिरिक्त कमाई के लालच में कुछ वाहन संचालक खतरनाक सामग्री का परिवहन कर लेते हैं, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ जाती है। ऐसी गतिविधियों पर अब कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
अंत में प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी बस संचालकों से अपील करते हुए कहा कि दुर्घटनाओं की रोकथाम केवल सरकारी कार्रवाई से संभव नहीं है, बल्कि इसमें बस ऑपरेटरों की जिम्मेदारी और जागरूकता भी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि सभी संचालक पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ सुरक्षा नियमों का पालन करें, तो बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का भरोसा दिया जा सकता है।