रतलाम में ईद का त्योहार इस बार बेहद उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर की लक्कड़पीठा स्थित पुरानी ईदगाह में नमाज के दौरान ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि परिसर छोटा पड़ गया और सैकड़ों नमाजियों को सड़क पर बैठकर नमाज अदा करनी पड़ी। पूरे क्षेत्र में “ईद मुबारक” की गूंज और भाईचारे का माहौल देखने को मिला।
सुबह से ही मुस्लिम समाज के लोग पारंपरिक और आकर्षक परिधानों में ईदगाह पहुंचने लगे थे। बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी में खास उत्साह नजर आया। मुख्य नमाज शहर काजी अहमद अली ने अदा कराई। नमाज के दौरान लोगों ने देश में अमन-चैन, खुशहाली और तरक्की के लिए दुआएं मांगीं।

नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। छोटे बच्चों में खासा उत्साह देखा गया, जो नए कपड़े पहनकर एक-दूसरे को बधाई देते नजर आए। ईदगाह के अलावा शहर की अन्य मस्जिदों में भी बड़ी संख्या में नमाज अदा की गई।
इस मौके पर शहर के महापौर प्रहलाद पटेल भी ईदगाह पहुंचे। उन्होंने शहर काजी अहमद अली और मुस्लिम समाज के लोगों को गले मिलकर ईद की शुभकामनाएं दीं। महापौर ने कहा कि ईद का त्योहार प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश देता है। सभी लोगों को मिलजुलकर रहना चाहिए और देश की तरक्की में अपना योगदान देना चाहिए।
शहर काजी अहमद अली ने भी अपने संदेश में कहा कि ईद हमें इंसानियत, भाईचारे और आपसी सौहार्द का पाठ पढ़ाती है। उन्होंने देशभर में शांति और समृद्धि के लिए दुआ की और प्रशासन का सहयोग के लिए आभार जताया।
ईद के इस अवसर पर प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र के कई प्रमुख लोग भी ईदगाह पहुंचे। अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों ने समाजजनों को बधाई दी। साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उपस्थित होकर एकता और सद्भाव का संदेश दिया।

ईदगाह में भीड़ अधिक होने के कारण व्यवस्थाएं संभालना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। सड़क पर बैठकर नमाज पढ़ने के बावजूद लोगों में कोई असुविधा या असंतोष नहीं दिखा, बल्कि सभी ने इसे त्योहार की भावना के साथ स्वीकार किया।
शहर में जगह-जगह ईद के अवसर पर विशेष सजावट की गई थी। बाजारों में भी रौनक देखने को मिली और मिठाइयों की दुकानों पर लोगों की भीड़ रही। कई स्थानों पर लंगर और सामूहिक भोज का आयोजन भी किया गया, जिसमें सभी समुदायों के लोगों ने भाग लिया।
कुल मिलाकर, रतलाम में ईद का पर्व सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल बनकर सामने आया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और शांतिपूर्ण आयोजन ने यह संदेश दिया कि त्योहार लोगों को जोड़ने का काम करते हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा भरते हैं।