इंदौर। साइबर ठग लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला इंदौर का है, जहां एक युवती को बैंक के रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम करने का झांसा देकर साइबर अपराधियों ने करीब 1.76 लाख रुपए की चपत लगा दी। युवती ने जैसे ही मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक कर ओटीपी दर्ज किया, उसका मोबाइल फोन अचानक काम करना बंद कर गया। कुछ दिनों बाद पता चला कि उसके बैंक खाते से अलग-अलग तारीखों में बड़ी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर कर ली गई है।
मामले की शिकायत मिलने के बाद एमआईजी थाना पुलिस और साइबर सेल ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उन बैंक खातों और यूपीआई आईडी की जानकारी जुटा रही है, जिनमें यह रकम ट्रांसफर की गई।
फर्जी रिवॉर्ड प्वाइंट मैसेज से शुरू हुई ठगी
जानकारी के अनुसार, खजराना मेन रोड निवासी प्रियंका सोनी को 24 मई को एक मोबाइल मैसेज प्राप्त हुआ। मैसेज में खुद को एक निजी बैंक का प्रतिनिधि बताते हुए कहा गया कि उनके खाते में जमा रिवॉर्ड प्वाइंट को तुरंत रिडीम किया जा सकता है। इसके लिए एक लिंक भी भेजा गया था।
मैसेज देखने पर सब कुछ सामान्य और बैंक से संबंधित प्रतीत हो रहा था। लिंक के साथ यह भी दावा किया गया था कि यह बैंक की आधिकारिक वेबसाइट है, जहां जाकर ग्राहक अपने रिवॉर्ड प्वाइंट को नकद लाभ या अन्य सुविधाओं में बदल सकते हैं।

रिवॉर्ड प्वाइंट के संबंध में जानकारी सही लगने पर युवती ने लिंक खोल दिया। वेबसाइट खुलने के बाद उससे मोबाइल नंबर दर्ज करने के लिए कहा गया। जैसे ही उसने नंबर दर्ज किया, उसके मोबाइल पर एक ओटीपी आया।
ओटीपी डालते ही बंद हो गया मोबाइल
युवती ने वेबसाइट पर प्राप्त ओटीपी दर्ज कर दिया। इसके तुरंत बाद उसका मोबाइल फोन असामान्य व्यवहार करने लगा और कुछ ही देर में पूरी तरह काम करना बंद कर गया।
उस समय उसे किसी साइबर धोखाधड़ी का संदेह नहीं हुआ। उसने समझा कि मोबाइल में कोई तकनीकी खराबी आ गई है। लेकिन इसी दौरान साइबर अपराधी उसके बैंक खाते तक पहुंच बनाने में सफल हो चुके थे।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में ठग फर्जी वेबसाइट के माध्यम से मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल कर देते हैं या फिर बैंकिंग संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे खाते से रकम निकालने की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं।
छह दिन में खाते से निकाली गई बड़ी रकम
करीब एक सप्ताह बाद 30 मई को युवती के मोबाइल पर लगातार तीन टेक्स्ट मैसेज आए। इन संदेशों को देखकर उसके होश उड़ गए।
मैसेज में बताया गया कि उसके बैंक खाते से अलग-अलग तारीखों में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन किए गए हैं। जांच करने पर सामने आया कि 24 मई को लगभग 49 हजार रुपए, 26 मई को 99 हजार रुपए और 28 मई को करीब 28 हजार रुपए खाते से ट्रांसफर किए गए थे।
इस प्रकार कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 76 हजार रुपए की राशि साइबर ठगों ने निकाल ली।
यूपीआई के जरिए किया गया ट्रांसफर
जब युवती ने बैंकिंग रिकॉर्ड और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच की, तो पता चला कि रकम विभिन्न यूपीआई आईडी के माध्यम से अलग-अलग खातों में भेजी गई थी।
इसके बाद उसने अपने परिवार के सदस्यों को पूरी घटना की जानकारी दी। परिवार की सलाह पर साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत की प्राथमिक जांच के बाद मामला एमआईजी थाना पुलिस को सौंपा गया, जहां एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस जुटा रही खाताधारकों की जानकारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में साइबर अपराध की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। अब उन बैंक खातों और यूपीआई आईडी की जानकारी निकाली जा रही है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई।
साइबर विशेषज्ञ यह भी जांच कर रहे हैं कि इस्तेमाल की गई वेबसाइट कहां से संचालित की जा रही थी और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं। पुलिस का मानना है कि यह किसी संगठित साइबर गिरोह की करतूत हो सकती है।
साइबर पुलिस की अपील
साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी बैंक, कंपनी या संस्था के नाम से आए लिंक पर बिना सत्यापन के क्लिक न करें। रिवॉर्ड प्वाइंट, केवाईसी अपडेट, लोन मंजूरी या कैशबैक जैसे संदेश अक्सर साइबर ठगों द्वारा लोगों को फंसाने के लिए भेजे जाते हैं।
पुलिस ने कहा है कि बैंक कभी भी फोन, मैसेज या लिंक के माध्यम से ग्राहकों से ओटीपी, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए नहीं कहते। यदि किसी लिंक पर क्लिक करने के बाद मोबाइल में असामान्य गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी लोगों की छोटी-सी लापरवाही का फायदा उठाकर उनकी मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर सकते हैं। इसलिए डिजिटल लेनदेन करते समय सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।