रिश्वतखोरी पर सख्त प्रहार: बीना मंडी के तत्कालीन सचिव और बाबू को 4-4 साल की जेल !

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मध्यप्रदेश के सागर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसले में विशेष न्यायालय ने बीना कृषि उपज मंडी में रिश्वत लेने के मामले में तत्कालीन मंडी सचिव और एक बाबू को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश शहाबुद्दीन हाशमी की अदालत ने दोनों आरोपियों को 4-4 वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासनिक और न्यायिक सख्ती का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

मामला बीना कृषि उपज मंडी में अनाज की एंट्री और अनुज्ञा जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार आरोपियों ने फरियादी से 8430 रुपए की घूस मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए आरोपी बाबू को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

फरियादी की शिकायत से खुला भ्रष्टाचार का मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 8 जून 2023 को फरियादी गोविंद वल्लभ ने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। गोविंद वल्लभ आरबी किसान केंद्र प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में मंडी परचेसिंग का कार्य करते हैं। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने 1686 क्विंटल गेहूं और मसूर खरीदी थी, जिसकी मंडी रिकॉर्ड में एंट्री कराकर अनुमति जारी करानी थी।

फरियादी का आरोप था कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए बीना कृषि उपज मंडी के तत्कालीन सचिव नवल सिंह रघुवंशी और सहायक ग्रेड-3 बाबू नितिन कुमार रैकवार ने प्रति क्विंटल 5 रुपए के हिसाब से कुल 8430 रुपए की रिश्वत मांगी। फरियादी ने रिश्वत देने के बजाय इसकी शिकायत लोकायुक्त से करने का निर्णय लिया।

जांच में सही पाई गई शिकायत

लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच की। जांच के दौरान आरोपों को सही पाया गया। इसके बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए विशेष योजना तैयार की।

12 जून 2023 को लोकायुक्त की विशेष टीम गठित कर बीना कृषि उपज मंडी भेजी गई। योजना के अनुसार फरियादी को रिश्वत की राशि देकर मंडी कार्यालय पहुंचाया गया। तय रणनीति के तहत फरियादी ने बाबू नितिन रैकवार को 8430 रुपए की रिश्वत दी।

जैसे ही रकम आरोपी को सौंपी गई, फरियादी ने सिर पर हाथ फेरकर लोकायुक्त टीम को पूर्व निर्धारित संकेत दिया। इशारा मिलते ही लोकायुक्त अधिकारियों ने मौके पर दबिश दी और आरोपी बाबू को रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य भी जब्त किए गए।

दोनों आरोपियों पर दर्ज हुआ भ्रष्टाचार का मामला

लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में तत्कालीन मंडी सचिव नवल सिंह रघुवंशी (61), निवासी बरईपुरा चौराहा, विदिशा तथा सहायक ग्रेड-3 बाबू नितिन कुमार रैकवार (44), निवासी मंडी बामोरा, सागर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और लोकायुक्त कार्रवाई से जुड़े प्रमाण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। शासन की ओर से मामले की पैरवी एडीपीओ एलपी कुर्मी ने की।

अदालत ने माना दोषी

विशेष न्यायाधीश शहाबुद्दीन हाशमी की अदालत ने सभी साक्ष्यों और तथ्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि दोनों आरोपी रिश्वत मांगने और लेने के अपराध में दोषी हैं। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत लेना गंभीर अपराध है और इससे शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

कोर्ट ने दोनों आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए 4-4 वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।

फैसले से भ्रष्टाचार पर लगेगी रोक

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों में कठोर सजा से सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। आम नागरिकों और व्यापारियों को भी यह संदेश मिलेगा कि यदि उनसे किसी प्रकार की अवैध मांग की जाती है, तो वे लोकायुक्त और अन्य जांच एजेंसियों की मदद लेकर न्याय प्राप्त कर सकते हैं।

यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि यदि शिकायतकर्ता साहस दिखाए और कानूनी प्रक्रिया का पालन करे, तो भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव है। लोकायुक्त की त्वरित कार्रवाई और अदालत के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रिश्वतखोरी के मामलों में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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