मध्यप्रदेश के बीना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-44 पर गुरुवार को एक बड़ा सड़क हादसा टल गया। मालथौन के पास स्थित नकटा पुलिया पर तेज रफ्तार कंटेनर अनियंत्रित होकर पुलिया की रेलिंग से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कंटेनर का अगला हिस्सा पुलिया के बाहर हवा में लटक गया। हादसे के बाद कुछ समय के लिए क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, हालांकि राहत की बात यह रही कि वाहन में सवार सभी लोग सुरक्षित बच गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना उस समय हुई जब कंटेनर तेज गति से हाईवे पर आगे बढ़ रहा था। अचानक पुलिया के पास पहुंचते ही चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और कंटेनर सीधे पुलिया की रेलिंग से जा टकराया। टक्कर के बाद वाहन आधा पुलिया पर और आधा बाहर की ओर झूलता नजर आया। घटना देखकर आसपास मौजूद लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।

आंध्र प्रदेश से दिल्ली जा रहा था कंटेनर
जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त कंटेनर क्रमांक यूके 08 सीबी 6696 आंध्र प्रदेश के चित्तूर से दिल्ली की ओर जा रहा था। कंटेनर चालक सत्य प्रकाश ने बताया कि वह सामान्य गति से वाहन चला रहा था, लेकिन नकटा पुलिया के पास सड़क की संरचना अचानक बदल जाती है।
चालक के मुताबिक, फोरलेन हाईवे होने के बावजूद पुलिया के पास सड़क काफी संकरी हो जाती है, जिससे वाहन चालकों को अचानक स्थिति संभालने में कठिनाई होती है। इसी कारण कंटेनर अनियंत्रित होकर पुलिया से टकरा गया।
चालक ने कहा कि यदि वाहन की गति थोड़ी और अधिक होती, तो कंटेनर सीधे पुलिया से नीचे गिर सकता था और बड़ा हादसा हो सकता था।
तीन लोग थे सवार, सभी सुरक्षित
हादसे के समय कंटेनर में चालक सहित कुल तीन लोग मौजूद थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन का अगला हिस्सा पुलिया से बाहर लटक गया, लेकिन सौभाग्य से कंटेनर पूरी तरह नीचे नहीं गिरा।
स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और वाहन में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना में किसी को गंभीर चोट नहीं आई, जिससे सभी ने राहत की सांस ली। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
पुलिया की तकनीकी खामी पर उठे सवाल
इस दुर्घटना के बाद एक बार फिर नकटा पुलिया की डिजाइन और सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिक आर.एस. सिंह ने बताया कि पुलिया की चौड़ाई फोरलेन सड़क की तुलना में लगभग चार फीट कम है। यही वजह है कि यहां आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर वाहन चालक तेज गति से चलते हैं, लेकिन अचानक सड़क का संकरा हो जाना उनके लिए खतरनाक स्थिति पैदा कर देता है। रात के समय या खराब मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है।
कई वाहन चालकों ने भी शिकायत की कि पुलिया के पास पर्याप्त चेतावनी संकेतक और सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। यदि समय रहते सड़क की संरचना में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
पहले भी हो चुकी हैं दुर्घटनाएं
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, नकटा पुलिया क्षेत्र पहले भी कई सड़क दुर्घटनाओं का गवाह बन चुका है। संकरी पुलिया और तेज रफ्तार वाहनों के कारण यहां अक्सर छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं।
लोगों का कहना है कि प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को इस समस्या की जानकारी कई बार दी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि पुलिया को फोरलेन सड़क के अनुरूप चौड़ा किया जाए और सुरक्षा बैरियर मजबूत किए जाएं।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर सवाल
यह घटना एक बार फिर देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे निर्माण के दौरान यदि पुलिया, मोड़ और सड़क चौड़ाई में तकनीकी संतुलन न रखा जाए, तो दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
यातायात विशेषज्ञों के अनुसार, फोरलेन सड़क पर अचानक संकरा रास्ता बनना “ब्लैक स्पॉट” की स्थिति पैदा करता है। ऐसे स्थानों पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड, स्पीड कंट्रोल और सड़क चौड़ीकरण जैसे कदम जरूरी होते हैं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक पुलिया की चौड़ाई नहीं बढ़ाई जाती और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होती, तब तक यहां हादसों का खतरा बना रहेगा।
फिलहाल पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कंटेनर को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और यातायात व्यवस्था सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि यह हादसा बिना जनहानि के टल गया, लेकिन इसने सड़क निर्माण की तकनीकी खामियों और सुरक्षा इंतजामों की कमी को एक बार फिर उजागर कर दिया है।