गर्भवती महिला की मौत पर बढ़ा विवाद: सेवा हॉस्पिटल की जांच पर शिवसेना ने उठाए सवाल, एम्स की टीम से जांच की मांग !

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मध्यप्रदेश के सागर के मकरोनिया स्थित सेवा हॉस्पिटल में गर्भवती महिला की इलाज के दौरान हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल प्रबंधन तथा स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। मामले में शिवसेना ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाएं सागर संभाग के सहायक संचालक को ज्ञापन सौंपा है।

शिवसेना नेताओं ने आरोप लगाया है कि मामले की जांच सही दिशा में नहीं हो रही और पूरे प्रकरण को दबाने की कोशिश की जा रही है। संगठन ने मांग की है कि इस संवेदनशील मामले की जांच स्थानीय स्तर पर न कराकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के वरिष्ठ चिकित्सकों की विशेष टीम से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

इलाज कराने पहुंची थी महिला, अस्पताल में हुई मौत

जानकारी के अनुसार, रहली निवासी 25 वर्षीय विद्या राय करीब डेढ़ माह की गर्भवती थी। बताया जा रहा है कि उसने गर्भपात से संबंधित कुछ दवाइयों का सेवन किया था, जिसके बाद उसकी तबीयत खराब हो गई। स्वास्थ्य बिगड़ने पर 4 मई को उसे इलाज के लिए सेवा हॉस्पिटल लाया गया था।

परिजनों का आरोप है कि महिला अस्पताल में सामान्य स्थिति में पहुंची थी। वह स्वयं बाइक पर बैठकर अस्पताल आई थी और उसे कोई गंभीर समस्या दिखाई नहीं दे रही थी। लेकिन अस्पताल में भर्ती होने और इलाज शुरू होने के बाद अचानक उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई।

महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति भी बनी थी।

“गुटखा की सुपारी फंसने” वाली बात पर सवाल

मामले में सबसे ज्यादा विवाद उस दावे को लेकर हो रहा है, जिसमें डॉक्टरों द्वारा महिला की मौत का कारण “गुटखा की सुपारी फंसना” बताया गया। शिवसेना जिला प्रभारी विकास सिंह ने इस दावे पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि महिला अस्पताल में गर्भावस्था और उससे जुड़ी समस्या का इलाज कराने पहुंची थी। ऐसे में अचानक सुपारी फंसने की बात सामने आना कई शंकाएं पैदा करता है। उन्होंने कहा कि यदि महिला की हालत इतनी गंभीर थी, तो उसे तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर क्यों नहीं किया गया।

विकास सिंह ने आरोप लगाया कि सेवा हॉस्पिटल में पहले भी इलाज के दौरान विवादित घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन हर बार मामले को दबा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी स्वास्थ्य विभाग की जांच निष्पक्ष नहीं लग रही।

सीएमएचओ की जांच पर उठे सवाल

शिवसेना नेताओं ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय (सीएमएचओ) द्वारा की जा रही जांच पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

ज्ञापन में मांग की गई है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि इलाज में लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

शिवसेना ने यह भी कहा कि निजी अस्पतालों में लगातार सामने आ रही लापरवाही की घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आम लोगों का निजी अस्पतालों से विश्वास उठ सकता है।

परिजनों में आक्रोश, न्याय की मांग

विद्या राय की मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। परिजनों का कहना है कि वे महिला को बेहतर इलाज की उम्मीद में अस्पताल लेकर गए थे, लेकिन उन्हें उसकी मौत की खबर मिली। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। खासकर गर्भवती महिलाओं के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है।

विशेषज्ञों ने बताई संवेदनशीलता की जरूरत

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था से संबंधित मामलों में मरीज की लगातार निगरानी और समय पर उचित उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी मरीज की हालत गंभीर हो, तो उसे तुरंत उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्र रेफर किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि किसी भी मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है। इसलिए जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से होनी चाहिए।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

सेवा हॉस्पिटल में हुई इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि कई निजी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के बावजूद गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है।

अब सबकी नजर स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो इससे न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सकेगी।

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