रीवा की घटना के विरोध में दमोह में जैन समाज का मौन प्रदर्शन: संत सुरक्षा की मांग को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन !

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दमोह। रीवा में जैन साध्वियों के साथ हुई दर्दनाक घटना के विरोध में सोमवार को दमोह में सकल दिगंबर जैन समाज ने मौन रैली निकालकर आक्रोश जताया। समाज के सैकड़ों महिला, पुरुष और बच्चों ने शांतिपूर्ण तरीके से शहर की सड़कों पर मार्च निकालते हुए संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।

जैन समाज के लोगों ने सुबह करीब 9 बजे श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन नन्हें मंदिर परिसर में एकत्र होकर मौन रैली की शुरुआत की। समाजजन सफेद वस्त्र और काली पट्टियां बांधकर हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर “संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करो”, “अहिंसा पर हमला बंद करो” और “दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो” जैसे संदेश लिखे थे।

यह मौन रैली नन्हें मंदिर से शुरू होकर पलंदी मंदिर, घंटाघर और शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कीर्ति स्तंभ पहुंची। पूरे मार्ग में समाजजन शांतिपूर्वक चलते रहे और किसी प्रकार के नारेबाजी से बचते हुए घटना के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया।

जैन समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि रीवा में हुई घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। उनका कहना था कि जैन संत और साध्वियां पूरी तरह अहिंसक और निहत्थे जीवन का पालन करते हैं। ऐसे संतों के साथ इस प्रकार की घटना होना बेहद दुखद और चिंताजनक है।

समाज की ओर से प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्यप्रदेश सरकार को संबोधित ज्ञापन कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को सौंपा गया। ज्ञापन में संतों और साध्वियों की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।

समाज के लोगों ने मांग की कि देशभर में विहार करने वाले जैन संतों के लिए “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की भी मांग उठाई गई।

प्रदर्शन के दौरान कई समाजजनों ने कहा कि यह केवल एक सड़क हादसा नहीं बल्कि पूरे जैन समाज की भावनाओं पर चोट है। उन्होंने कहा कि साधु-संत समाज को शांति, संयम और अहिंसा का संदेश देते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

ज्ञापन प्राप्त करने के बाद कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए समाज को आश्वासन दिया कि दमोह जिले में साधु-संतों के आगमन पर उन्हें पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस विषय को गंभीरता से ले रहा है और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

जैन समाज का यह विरोध केवल दमोह तक सीमित नहीं रहा। जिले के जबेरा, बांदकपुर, हटा, पथरिया, तेंदूखेड़ा और बटियागढ़ सहित अन्य क्षेत्रों में भी समाज के लोगों ने ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया।

रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी देखने को मिली। कई लोगों ने इसे केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा और संवेदनशीलता से जुड़ा मुद्दा बताया।

समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि संतों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

फिलहाल दमोह सहित पूरे प्रदेश में जैन समाज इस घटना को लेकर भावनात्मक रूप से आहत दिखाई दे रहा है और संतों की सुरक्षा को लेकर शासन से स्पष्ट एवं प्रभावी नीति बनाने की मांग तेज हो गई है।

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