सागर। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र अंतर्गत मोहाली परिक्षेत्र के मानेगांव बीट के कक्ष क्रमांक 159 में सोमवार शाम करीब 5:30 बजे एक बाघ का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, उक्त बाघ को 18-19 जनवरी की दरमियानी रात रेडियो कॉलर लगाकर रिजर्व के कोर वन क्षेत्र में छोड़ा गया था। वन विभाग की मॉनिटरिंग टीम लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी।
दो दिनों से एक ही स्थान पर मिल रही थी लोकेशन
विगत दो दिनों से बाघ की लोकेशन एक ही स्थान पर स्थिर मिल रही थी, जिससे मॉनिटरिंग दल को संदेह हुआ। टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो बाघ मृत अवस्था में मिला। इसके बाद उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई और जांच प्रक्रिया शुरू की गई।

डॉग स्क्वॉड व जल स्रोतों की जांच
मंगलवार सुबह डॉग स्क्वॉड की मदद से मृत बाघ के आसपास के क्षेत्र में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया। साथ ही शव के निकट स्थित जल स्रोतों एवं आसपास के अन्य जल स्रोतों की लिटमस पेपर द्वारा पीएच वैल्यू की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में किसी प्रकार के जहर या संदिग्ध तत्व के संकेत नहीं मिले।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रोटोकॉल के तहत पोस्टमार्टम
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार पन्ना टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता, रहली के स्थानीय पशु चिकित्सक डॉ. नीरज ठाकुर, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि डॉ. प्रशांत देशमुख तथा वन संरक्षक सागर श्री रिपुदमन सिंह भदोरिया की उपस्थिति में शव का पोस्टमार्टम किया गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बाघ की खोपड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त थी, कई हड्डियां टूटी हुई थीं तथा शरीर पर गहरे कैनाइन (दांत) के निशान पाए गए।
विशेषज्ञों की राय: आपसी संघर्ष में हुई मौत
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत देशमुख एवं वरिष्ठ वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता की प्रारंभिक राय के अनुसार यह मामला बाघों के आपसी क्षेत्रीय संघर्ष का प्रतीत होता है। संभावना जताई गई है कि दूसरे बाघ के साथ हुई भीषण लड़ाई में उक्त बाघ की मौत हुई।
अंतिम संस्कार किया गया
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात विशेषज्ञों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में बाघ के शव का विधिवत दाह संस्कार किया गया।
वन विभाग द्वारा मामले की विस्तृत जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि रिजर्व क्षेत्र में बाघों की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी।