र्ल्ड थायराइड डे: बदलती लाइफस्टाइल बना रही बीमारी का बड़ा कारण !

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World Thyroid Day के अवसर पर मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ रहे थायराइड रोग को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, जंक फूड और प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग ने इस बीमारी के खतरे को पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा दिया है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-5) के अनुसार प्रदेश में हर 34वां व्यक्ति थायराइड की समस्या से प्रभावित है। महिलाओं में यह बीमारी पुरुषों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार पहले थायराइड का मुख्य कारण केवल आयोडीन की कमी और ऑटोइम्यून बीमारियों को माना जाता था, लेकिन अब नई रिसर्च में कई नए कारण सामने आए हैं। इनमें विटामिन-डी की कमी, खराब गट हेल्थ, तनाव, प्रोसेस्ड फूड और प्लास्टिक से निकलने वाले खतरनाक केमिकल्स प्रमुख हैं। भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा की गई रिसर्च में यह भी सामने आया है कि शहरी आबादी में थायराइड के मामले ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में लगभग दोगुने हैं।

रिसर्च के अनुसार गांवों में लोगों की शारीरिक गतिविधियां ज्यादा होती हैं। वहां लोग अधिक पैदल चलते हैं, मेहनत वाला काम करते हैं और प्रोसेस्ड फूड का उपयोग कम करते हैं। वहीं शहरों में लोगों की दिनचर्या बैठकर काम करने वाली हो गई है। जंक फूड, पैकेज्ड फूड और प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग ने लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है।

विशेषज्ञों ने खासतौर पर एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स यानी ईडीसीएस को थायराइड के लिए बेहद खतरनाक बताया है। ये केमिकल्स प्लास्टिक की बोतलों, फूड पैकेजिंग, परफ्यूम, रेनकोट, पानी के पाइप और कई घरेलू सामानों में पाए जाते हैं। जब गर्म खाना प्लास्टिक के डिब्बों में रखा जाता है, तो इनसे निकलने वाले केमिकल्स शरीर में पहुंचकर हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यही वजह है कि अब थायराइड के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं।

विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपनी रसोई से प्लास्टिक के डिब्बे और बोतलों का उपयोग कम करें। पानी के लिए मिट्टी या तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल करें। साथ ही गर्म खाना प्लास्टिक के कंटेनर में रखने से बचें।

रिसर्च में यह भी सामने आया है कि गट हेल्थ यानी आंतों का स्वास्थ्य थायराइड से गहराई से जुड़ा हुआ है। हमीदिया अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा के अनुसार आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया शरीर को आयोडीन, आयरन और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करते हैं। यही तत्व थायराइड हार्मोन को बनाने और सक्रिय रखने के लिए बेहद जरूरी होते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि दही, छाछ, इडली और दाल जैसी चीजें गट हेल्थ को बेहतर बनाती हैं और थायराइड को नियंत्रित रखने में मदद करती हैं। इसके विपरीत जंक फूड, ज्यादा तला-भुना भोजन और खराब पाचन की समस्या वाले लोगों में हाइपोथायराइडिज्म का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि शरीर में बनने वाला टी-4 हार्मोन सीधे उपयोगी नहीं होता। शरीर को टी-3 हार्मोन की जरूरत होती है और इसका एक बड़ा हिस्सा आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया की मदद से बनता है। यदि गट माइक्रोबायोम खराब हो जाए, तो यह प्रक्रिया प्रभावित होती है और थायराइड की समस्या बढ़ने लगती है।

महिलाओं में थायराइड के मामले तेजी से बढ़ने को लेकर भी रिसर्च में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार 12वीं या उससे अधिक पढ़ाई करने वाली महिलाओं में थायराइड की दर काफी अधिक पाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षित महिलाएं स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक होती हैं और समय-समय पर जांच कराती हैं, इसलिए उनमें मामले ज्यादा सामने आते हैं।

आंकड़ों के अनुसार 15 से 19 वर्ष की आयु की युवतियों में थायराइड के मामले अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन 35 से 49 वर्ष की उम्र के बीच यह समस्या तेजी से बढ़ जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक हार्मोनल बदलाव, तनाव और बढ़ती उम्र के साथ मेटाबॉलिज्म में बदलाव इसके बड़े कारण हैं।

विशेषज्ञों ने थायराइड से बचाव के लिए रोजाना वॉक करने, पर्याप्त नींद लेने और तनाव कम करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि नियमित व्यायाम शरीर के हार्मोन संतुलन को बेहतर बनाए रखता है। साथ ही स्क्रीन टाइम कम करने और मानसिक तनाव से दूर रहने की भी जरूरत है।

डॉक्टरों ने यह भी कहा कि जिन परिवारों में पहले से थायराइड की हिस्ट्री है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों को सोया आधारित खाद्य पदार्थों और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड से बचना चाहिए, क्योंकि ये थायराइड हार्मोन के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार थायराइड अब केवल एक सामान्य बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह बदलती जीवनशैली से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। यदि समय रहते खानपान, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में इसके मरीजों की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है।

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