लोकसभा में वंदे मातरम् पर 10 घंटे की बहस: सरकार vs विपक्ष के 6 बड़े दावे !

Spread the love

लोकसभा में सोमवार को वंदे मातरम् को लेकर लगभग 10 घंटे लंबी बहस हुई। बहस की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की, जिसके बाद सरकार और विपक्ष के बीच कई ऐतिहासिक दावों को लेकर तीखी बहस देखी गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए और इतिहास के पन्ने खंगाले।

सरकार के दावे और उनकी हकीकत

दावा 1: कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए

पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् के “टुकड़े” कर दिए और मुस्लिम लीग के राजनीतिक दबाव में यह निर्णय लिया।

सच्चाई

  • वंदे मातरम् के 4 छंद हटाने का फैसला कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने लिया था। इसमें गांधी, नेहरू, पटेल, सुभाषचंद्र बोस जैसे बड़े नेता शामिल थे।
  • 1937 में नेहरू ने बोस को लिखी चिट्ठी में कहा था कि वंदे मातरम् पर विवाद “सांप्रदायिक तत्वों की साजिश” है।
  • 1948 में भी नेहरू ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगान बनाने का विरोध किया था, लेकिन इसका कारण मुसलमानों का विरोध नहीं, बल्कि उसकी “कठिन भाषा” और “संगीत की जटिलता” था।

दावा 2: नेहरू ने कहा था कि वंदे मातरम् से मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है

पीएम मोदी ने कहा कि नेहरू ने 20 अक्टूबर 1937 को नेताजी बोस को पत्र लिखकर यह बात कही।

सच्चाई

  • यह दावा आंशिक रूप से सही है।
  • नेहरू ने उस चिट्ठी में लिखा था कि ‘आनंदमठ’ की पृष्ठभूमि मुसलमानों को परेशान कर सकती है और गीत की भाषा कठिन है।
  • इसी विवाद पर सलाह लेने के लिए उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर से भी राय मांगी थी।
  • टैगोर ने लिखा कि वंदे मातरम् के पहले दो छंदों में किसी प्रकार का विवाद नहीं है और बाकी छंद छोड़े जा सकते हैं।

दावा 3: महात्मा गांधी ने वंदे मातरम् की बहुत तारीफ की थी

पीएम मोदी ने कहा कि गांधी ने इसे राष्ट्रीय गीत के बराबर बताया था।

सच्चाई

  • गांधी ने 1905 में Indian Opinion में वंदे मातरम् की प्रशंसा की थी।
  • उन्होंने इसे भावनात्मक रूप से मजबूत गीत बताया।
  • लेकिन बाद में उन्होंने माना कि इसका सांप्रदायिक इस्तेमाल हो रहा है, और इसकी तुलना “अल्लाहू अकबर” के नारे से की—दोनों नारे अपने मूल रूप में आपत्तिजनक नहीं, लेकिन साम्प्रदायिक रूप से इस्तेमाल किए गए।

विपक्ष के दावे और उनकी हकीकत

दावा 4: जितने साल मोदी पीएम रहे हैं, उतने ही समय नेहरू जेल में रहे

प्रियंका गांधी ने कहा कि नेहरू उतने दिन जेल में रहे, जितने साल मोदी प्रधानमंत्री हैं।

सच्चाई

  • नेहरू कुल 9 बार जेल गए और 3258 दिन कैद में रहे।
  • मोदी अब तक (2014–2025) 4215 दिन से अधिक समय से प्रधानमंत्री हैं।
  • यानी नेहरू से 957 दिन अधिक समय मोदी पीएम रहे हैं।
    यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है।

दावा 5: हिंदू महासभा ने वंदे मातरम् का विरोध किया था

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि हिंदू महासभा ने भी वंदे मातरम् की आलोचना की थी।

सच्चाई

  • यह दावा गलत है।
  • हिंदू महासभा ने वंदे मातरम् को हिंदू गौरव और राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में प्रचारित किया।
  • अक्टूबर 1937 में महासभा ने पुणे और बॉम्बे में वंदे मातरम् दिवस मनाया।
  • महासभा ने कांग्रेस द्वारा केवल पहले दो छंद अपनाने के फैसले की आलोचना की थी, गीत की नहीं।

दावा 6: RSS ने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया

कांग्रेस सांसद गोगोई ने कहा कि RSS ने आंदोलन में भाग ही नहीं लिया।

सच्चाई

  • एक संगठन के रूप में RSS भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल नहीं हुआ।
  • 1942 में संघ प्रमुख गोलवलकर ने स्वयंसेवकों को आंदोलन से दूर रहने की सलाह दी थी।
  • हालांकि RSS के व्यक्तिगत स्तर पर कुछ स्वयंसेवक आंदोलन में जुड़े थे।
  • इसलिए दावा आंशिक रूप से सही है।

बहस क्यों हुई?

सरकार ने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर यह विशेष चर्चा कराई।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह बहस आगामी बंगाल चुनाव को ध्यान में रखकर कराई गई।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में 13 बार कांग्रेस, 7 बार नेहरू और 3 बार जिन्ना का जिक्र किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *