लोक अदालत में सुलझा वैवाहिक विवाद, आपसी समझौते से फिर जुड़ा रिश्ता !

Spread the love

गढ़ाकोटा। शनिवार को आयोजित लोक अदालत में एक वैवाहिक विवाद का सुखद और सौहार्दपूर्ण समाधान सामने आया, जहां दोनों पक्षों ने आपसी मतभेद भुलाकर समझौते का रास्ता अपनाया और मामले का खुशी-खुशी निपटारा हो गया। इस फैसले ने न केवल एक परिवार को टूटने से बचाया, बल्कि समाज को भी यह संदेश दिया कि संवाद और समझदारी से बड़े से बड़े विवाद का समाधान संभव है।

लोक अदालत में लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक चर्चा की गई। न्यायालय ने मामले को केवल कानूनी दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए देखने का प्रयास किया।

यह समझौता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेश शर्मा के मार्गदर्शन तथा अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) अम्बर श्रीवास्तव की उपस्थिति में संपन्न हुआ। न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों को धैर्यपूर्वक समझाइश दी गई, जिसके बाद पति-पत्नी ने पुराने विवाद समाप्त कर आपसी सहमति से समाधान स्वीकार कर लिया।

मामले में आवेदक पक्ष के अधिवक्ता विवेक भगवत एवं अनावेदक पक्ष के अधिवक्ता हेमराज प्रजापति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों अधिवक्ताओं ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा कराते हुए पक्षकारों को समझौते के लिए प्रेरित किया। लगातार बातचीत और समझाइश के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और विवाद समाप्त हो गया।

लोक अदालत में हुए इस समझौते के दौरान अधिवक्ता संघ अध्यक्ष जमील कुरैशी सहित अन्य अधिवक्ता भी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पारिवारिक मामलों में आपसी समझ और संवाद सबसे महत्वपूर्ण होता है।

विशेष रूप से अधिवक्ता विवेक भगवत का सहयोग इस मामले में उल्लेखनीय रहा। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच विश्वास कायम करने और विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लोक अदालत का उद्देश्य केवल मुकदमों का निपटारा करना नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और आपसी रिश्तों को बनाए रखना भी है। ऐसे मामलों में जब परिवार टूटने की कगार पर पहुंच जाते हैं, तब न्यायालय की समझाइश और सकारात्मक प्रयास कई बार रिश्तों को नया जीवन दे देते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि वैवाहिक विवादों में यदि समय रहते संवाद और समझदारी का रास्ता अपनाया जाए तो अधिकांश मामलों का समाधान आसानी से निकल सकता है। लंबे समय तक चलने वाले विवाद न केवल पति-पत्नी, बल्कि पूरे परिवार और बच्चों के भविष्य पर भी असर डालते हैं।

लोक अदालत में हुए इस समझौते ने यह साबित कर दिया कि अदालतें केवल फैसले सुनाने का मंच नहीं हैं, बल्कि समाज में रिश्तों को बचाने और सकारात्मक माहौल बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे समाधान समाज के लिए प्रेरणादायक हैं और लोगों को न्यायालय के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। लोक अदालत के इस सफल आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आपसी संवाद, धैर्य और समझदारी से हर समस्या का समाधान संभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *