मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत हंगामे के साथ हुई, जब कांग्रेस विधायक और भाजपा के एक पूर्व मंत्री ने सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। इस दिन की शुरुआत कांग्रेस के नेताओं द्वारा कर्ज के बढ़ते बोझ और राज्य सरकार की नीतियों के विरोध के रूप में हुई, जबकि भाजपा विधायक भूपेंद्र सिंह ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए और व्यवस्था सुधारने के लिए अपनी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

कांग्रेस का कर्ज विरोध:
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक विधानसभा पहुंचे और उन्होंने हाथों में कटोरा लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लगातार बढ़ाए जा रहे कर्ज के विरोध में था। कांग्रेस के नेताओं ने यह आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राज्य को कर्ज में डुबोकर इसे भिखारियों का प्रदेश बनाने की ओर बढ़ा रही है।
उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा, “यह कटोरा दर्शाता है कि मध्यप्रदेश को भाजपा सरकार भिखारी बना रही है। हर व्यक्ति पर करीब 50 हजार रुपए का कर्ज हो चुका है। इस कर्ज का इस्तेमाल सरकार की सुख-सुविधाओं को पूरा करने के लिए किया जा रहा है।” कांग्रेस ने इस विरोध प्रदर्शन में विधानसभा परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने जमकर नारेबाजी की।

भूपेंद्र सिंह ने उठाए सवाल:
इस बीच, भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी अपनी ही सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह उनकी ड्यूटी है कि वह व्यवस्था सुधारने के लिए आवाज उठाएं। भूपेंद्र सिंह ने कहा, “मैंने व्यवस्था सुधारने के लिए कहा है। विधायक हूं, यह मेरी ड्यूटी है। अगर सरकार के लोग ध्यान में नहीं लाएंगे तो गड़बड़ी कैसे सुधरेगी? क्या हम अधिकारियों को खुली छूट दे देंगे?”
भूपेंद्र सिंह ने इसके साथ ही सोमवार को स्कूलों में बच्चों के यौन शोषण का मामला उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई स्कूलों में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, और अशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं के नाम पर व्यापार चल रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा और कहा कि सरकारी अधिकारियों के द्वारा दिए गए जवाब पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे अक्सर सही जानकारी नहीं देते।

सरकार की प्रतिक्रिया:
हालांकि भूपेंद्र सिंह ने अपनी सरकार के कामों की सराहना भी की। उन्होंने कहा, “सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है। लेकिन जब कहीं गड़बड़ी हो रही है तो सरकार के लोग इसे सुधारने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अगर हम अधिकारियों को बिना किसी निगरानी के छोड़ देंगे, तो गड़बड़ी ठीक कैसे होगी?”

मध्यप्रदेश विधानसभा का यह सत्र इसलिए महत्वपूर्ण बन गया क्योंकि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पक्षों के नेता अपनी-अपनी सरकार के खिलाफ खुलकर बयानबाजी कर रहे थे। कांग्रेस के नेता राज्य में कर्ज के बढ़ते बोझ को लेकर विरोध कर रहे थे, जबकि भाजपा विधायक भूपेंद्र सिंह अपनी ही सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे थे। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि राज्य की राजनीतिक स्थिति काफी जटिल हो चुकी है, जहां विपक्षी पार्टी सरकार के खिलाफ आक्रामक है, वहीं सत्ता पक्ष के अंदर भी सुधार की आवश्यकता को लेकर आवाजें उठ रही हैं।