दमोह। शहर के वृद्धाश्रम परिसर के बाहर दीवार पर भगवान श्रीराम और हनुमान जी के चित्र बनाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने इन चित्रों को धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध बताते हुए कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि जिस स्थान पर चित्र बनाए गए थे, वहां पहले से गंदगी फैली हुई थी, जिससे भगवान के चित्रों का अपमान हो रहा था। वहीं चित्र बनवाने वाले रेडक्रॉस समिति के सदस्य ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य केवल गंदगी रोकना था, किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं।
जानकारी के अनुसार दमोह स्थित वृद्धाश्रम के बाहर कुछ समय पहले तक “नेकी की दीवार” का संचालन किया जाता था। इस पहल के तहत जरूरतमंद लोगों के लिए पुराने कपड़े और अन्य उपयोगी सामग्री रखी जाती थी। प्रारंभ में यह व्यवस्था सामाजिक सेवा के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन समय बीतने के साथ लोगों ने यहां अनियंत्रित रूप से पुराने और अनुपयोगी कपड़े फेंकना शुरू कर दिया। इसके कारण परिसर के बाहर गंदगी बढ़ने लगी और आसपास का वातावरण भी प्रभावित होने लगा।
लगातार बढ़ती अव्यवस्था और गंदगी को देखते हुए “नेकी की दीवार” को बंद कर दिया गया। इसके बावजूद कई लोग पुराने कपड़े और अन्य सामान वहां फेंकते रहे। स्थानीय लोगों और वृद्धाश्रम प्रबंधन द्वारा कई बार लोगों को समझाइश भी दी गई, लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ।

इसी समस्या से परेशान होकर रेडक्रॉस समिति के सदस्य केदार शर्मा ने दो दिन पहले वृद्धाश्रम की बाहरी दीवार पर भगवान श्रीराम और हनुमान जी के चित्र बनवाए। उनका मानना था कि धार्मिक चित्रों के कारण लोग उस स्थान पर गंदगी फैलाने से बचेंगे और कपड़े फेंकना बंद कर देंगे। हालांकि यह प्रयास अब विवाद का कारण बन गया है।
हिंदू संगठन से जुड़े नित्या प्यासी ने शनिवार रात कोतवाली थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस स्थान पर भगवान के चित्र बनाए गए थे, वहां पहले से गंदगी मौजूद थी। ऐसे स्थान पर धार्मिक चित्र बनाना भगवान का अपमान है और इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना है कि यदि किसी स्थान पर भगवान के चित्र लगाए जाते हैं तो वहां साफ-सफाई, सम्मान और पूजा की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
शिकायतकर्ता के अनुसार संगठन के लोगों ने चित्र बनवाने वाले व्यक्ति से इन्हें हटाने या पुतवाने की बात कही थी, लेकिन कथित रूप से इस पर सहमति नहीं बनी। इसके बाद संगठन के कार्यकर्ताओं ने स्वयं चित्रों की पुताई करा दी। साथ ही पुलिस से मांग की गई कि मामले की जांच कर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में उचित कार्रवाई की जाए।
इस घटनाक्रम के बाद शहर में चर्चा का माहौल बन गया है। कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला मान रहे हैं, जबकि कई नागरिकों का कहना है कि चित्र बनवाने का उद्देश्य केवल गंदगी रोकना था और इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
वहीं रेडक्रॉस समिति के सदस्य केदार शर्मा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि वृद्धाश्रम के बाहर लगातार गंदगी फैल रही थी। लोग पुराने कपड़े और अन्य वस्तुएं वहां फेंक देते थे, जिससे न केवल वातावरण खराब हो रहा था बल्कि वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को भी परेशानी होती थी। कई बार समझाने के बावजूद लोग नहीं माने, इसलिए धार्मिक चित्र बनवाने का निर्णय लिया गया।
केदार शर्मा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म या समुदाय की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। उनका मानना था कि भगवान के चित्र देखकर लोग उस स्थान पर कचरा या कपड़े फेंकने से बचेंगे। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इससे आपत्ति हुई है तो उसका सम्मान किया जाएगा, लेकिन उनकी मंशा पूरी तरह सकारात्मक थी।
उन्होंने प्रशासन से भी मांग की है कि वृद्धाश्रम के बाहर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाए जाएं, जिनमें लोगों से पुराने कपड़े या अन्य सामग्री वहां न फेंकने की अपील की जाए। उनका कहना है कि यदि उचित सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध होगी तो ऐसी समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी।
फिलहाल पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान लिए जाएंगे और पूरे घटनाक्रम की वस्तुस्थिति जानने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक प्रतीकों का उपयोग किस प्रकार और किन परिस्थितियों में किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि स्वच्छता बनाए रखने के प्रयास और धार्मिक आस्थाओं के सम्मान के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।