सागर संभाग के कमिश्नर श्री अनिल सुचारी ने शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग एवं जनजाति कार्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संभाग के सभी सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कराया जाए तथा जिन विद्यालयों का निर्माण पूरा हो चुका है, उनमें तत्काल शैक्षणिक गतिविधियां प्रारंभ की जाएं। उन्होंने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों तक समय पर पहुंचना चाहिए और इसके लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें।
कमिश्नर श्री सुचारी ने ये निर्देश शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग एवं जनजाति कार्य विभाग की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में शिक्षा व्यवस्था, छात्रवृत्ति योजनाओं, स्कूल प्रवेश अभियान, परीक्षा परिणाम तथा विभिन्न योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बालिका शौचालय निर्माण कार्य की समीक्षा के दौरान संयुक्त संचालक शिक्षा, सागर संभाग ने जानकारी दी कि संभाग की सभी शालाओं में बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। जिन विद्यालयों में शौचालयों की मरम्मत आवश्यक थी, वहां भी मरम्मत कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इस पर कमिश्नर ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक है।

नए शिक्षा सत्र में विद्यार्थियों के प्रवेश अभियान की समीक्षा करते हुए कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र शत-प्रतिशत बच्चों का स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से कक्षा पहली, कक्षा छठवीं और कक्षा नववीं में प्रवेश प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान प्रवेश कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी भी व्यक्त की।
कमिश्नर ने कहा कि कोई भी पात्र बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से प्रयास करने होंगे। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रवेश के साथ ही विद्यार्थियों को शासन द्वारा प्रदत्त निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण समय पर सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में बोर्ड परीक्षाओं सहित अन्य परीक्षाओं के परिणामों की भी समीक्षा की गई। संयुक्त संचालक शिक्षा द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के आधार पर कमिश्नर ने उन विद्यालयों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए जिनका परीक्षा परिणाम 30 प्रतिशत से कम रहा है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन शालाओं का परीक्षा परिणाम लगातार खराब है, वहां के प्राचार्यों के साथ-साथ संबंधित विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। कम परीक्षा परिणाम वाले विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कमिश्नर ने “गांव की बेटी” एवं “प्रतिभा किरण” योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति वितरण की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्रवृत्ति वितरण से संबंधित लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जाए और पात्र छात्राओं को समय पर छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाए।
इसके साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं की भी समीक्षा की गई। कमिश्नर ने कहा कि जिन पात्र विद्यार्थियों को अब तक छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिला है, उन्हें तत्काल लाभान्वित किया जाए ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो।
बैठक में सीएम हेल्पलाइन के लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। कमिश्नर ने शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और जनजाति कार्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित शिकायतों का समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि नागरिकों की शिकायतों के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
कमिश्नर ने शिक्षा विभाग में लंबित पेंशन प्रकरणों पर भी चिंता व्यक्त की और संयुक्त संचालक शिक्षा को निर्देश दिए कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े सभी लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाए।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना तथा वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत संचालित कार्यों की भी समीक्षा की गई। कमिश्नर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाने के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
बैठक में जनजाति कार्य विभाग, उच्च शिक्षा विभाग एवं शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कमिश्नर ने सभी विभागों को समन्वित प्रयासों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, छात्र हितों की सुरक्षा तथा शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।