सागर कलेक्ट्रेट में युवक ने रामचरितमानस जलाकर आत्मदाह की कोशिश की, मचा हड़कंप ! कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब जनसुनवाई के दौरान एक युवक ने कथित तौर पर रामचरितमानस में आग लगाने के बाद खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की। मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए युवक को पकड़ लिया और उसके हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली। घटना के बाद परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार युवक की पहचान जैसीनगर थाना क्षेत्र के घोघरी गांव निवासी बहादुर चढ़ार (37) के रूप में हुई है। बहादुर जनसुनवाई में अपनी शिकायत लेकर पहुंचा था। उसने आरोप लगाया कि पिछले करीब दस वर्षों से उसे न्याय नहीं मिला और उसकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की गई। घटना के दौरान उसने कहा कि “या तो मुझे न्याय दिया जाए या फिर गोली मार दी जाए।”
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बहादुर अपने साथ पेट्रोल से भरी बोतल और पटाखे लेकर पहुंचा था। उसने पहले जमीन पर रामचरितमानस रखी और उसमें आग लगा दी। इसके बाद उसने अपने शरीर पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उसे पकड़ लिया। पुलिसकर्मियों ने पानी डालकर आग बुझाई। आग लगने से धार्मिक ग्रंथ का बाहरी कवर जल गया।

घटना के बाद वहां मौजूद लोगों में आक्रोश फैल गया। कई लोगों ने धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात कहते हुए युवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कुछ लोगों ने मौके पर ही एफआईआर दर्ज करने की मांग भी उठाई। बाद में पुलिस युवक को हिरासत में लेकर Gopalganj Police Station ले गई।
बहादुर चढ़ार ने मीडिया और पुलिस के सामने आरोप लगाया कि वर्ष 2015 में उसके साथ मारपीट की गई थी। उसका कहना है कि एक व्यक्ति ने कथित तौर पर कट्टा अड़ाकर उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया और पेशाब मिलाकर भोजन खिलाया। उसने दावा किया कि इस मामले की शिकायत उसने कई बार थाने और पुलिस अधिकारियों से की, लेकिन उसे न्याय नहीं मिला।
बहादुर का कहना है कि घटना के बाद वह सबसे पहले जैसीनगर थाने पहुंचा था, लेकिन वहां उसकी शिकायत नहीं सुनी गई। इसके बाद उसने गोपालगंज थाने और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी आवेदन दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसी से परेशान होकर उसने यह कदम उठाने का निर्णय लिया।
हालांकि जिन व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं, उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया है। संबंधित पक्ष का कहना है कि वह बहादुर चढ़ार को जानता तक नहीं है और लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं।

घटना के दौरान बहादुर ने कथित तौर पर कहा कि “जब सत्य ही नहीं है तो रामायण भी जलने दो और मुझे भी।” इस बयान के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया। हालांकि बाद में हिंदूवादी संगठनों के कुछ लोगों के मौके पर पहुंचने पर उसने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक द्वारा धार्मिक ग्रंथ में आग लगाने की घटना देखकर वहां मौजूद लोगों ने तुरंत विरोध जताया। कई लोगों ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में धार्मिक ग्रंथ का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि युवक मानसिक तनाव में दिखाई दे रहा था और उसकी शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। कलेक्ट्रेट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी देखी जा रही है, ताकि घटना के हर पहलू की जांच की जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच के बाद कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। युवक द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है। साथ ही धार्मिक भावनाएं आहत करने और आत्मदाह की कोशिश से जुड़े पहलुओं को भी जांच में शामिल किया गया है।
घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू पर गंभीरता से जांच की जा रही है, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।