सागर के गांवों में गहराया जलसंकट: 2 किलोमीटर दूर से पानी ला रहे ग्रामीण, नल-जल योजना बनी शोपीस !

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जिले में भीषण गर्मी के बीच जलसंकट लगातार गहराता जा रहा है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के साथ ही गांवों के हैंडपंप, कुएं और अन्य जलस्रोत सूखने लगे हैं। जिले के कई गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। खासकर ग्राम बम्होरी बीका और बगासपुरा में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है, जबकि करोड़ों की नल-जल योजनाएं सिर्फ कागजों और टंकियों तक सीमित दिखाई दे रही हैं।

“जब से गांव आए, पानी का सुख नहीं मिला”

ग्राम बम्होरी बीका की रहने वाली वैजयंती बाई कोरी की पीड़ा गांव की हकीकत बयां करती है। वे कहती हैं, “गांव में पीने का पानी नहीं है। दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। मैं जब से इस गांव में बहू बनकर आई हूं, तब से पानी के लिए परेशान हूं। यहां कभी पानी का सुख नहीं मिला।”

उनका कहना है कि गांव में नल-जल योजना के तहत पानी की टंकी बनाई गई और घर-घर पाइपलाइन भी बिछाई गई, लेकिन आज तक लोगों को एक बूंद पानी नहीं मिला। गांव के लोग रोजाना टंकी को देखते हैं, लेकिन उससे पानी सप्लाई कब शुरू होगी, यह किसी को नहीं पता।

हैंडपंपों ने भी छोड़ा साथ

बम्होरी बीका गांव में कुल चार हैंडपंप हैं, लेकिन भीषण गर्मी के कारण उनमें पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। हालत यह है कि लोगों को एक बाल्टी पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। सुबह से शाम तक हैंडपंपों पर महिलाओं और बच्चों की लंबी कतारें लगी रहती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार हैंडपंपों से सिर्फ थोड़ी देर के लिए पानी निकलता है और फिर वे सूख जाते हैं। ऐसे में लोगों को मजबूरी में दूसरे गांवों या निजी कुओं का सहारा लेना पड़ रहा है।

निजी कुओं और बोरवेल पर निर्भर ग्रामीण

गांव के निवासी सूरज पांडे बताते हैं कि गांव में वर्षों से पानी की समस्या बनी हुई है। गर्मियों में हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं। जिन लोगों के पास निजी बोरवेल या कुएं हैं, वही पानी बेचकर लोगों की जरूरत पूरी कर रहे हैं।

कई परिवार निजी कुओं से पाइपलाइन कनेक्शन लेकर पानी का उपयोग कर रहे हैं और इसके लिए भुगतान भी कर रहे हैं। वहीं गरीब परिवारों को पानी खरीदकर जीवन यापन करना पड़ रहा है। यदि बिजली चली जाए तो पूरा गांव पानी के लिए परेशान हो जाता है, क्योंकि मोटर बंद होने से पानी मिलना मुश्किल हो जाता है।

नल-जल योजना पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में करीब दो से तीन साल पहले नल-जल योजना के तहत पानी की टंकी बनाई गई थी। पाइपलाइन भी पूरे गांव में बिछाई गई, लेकिन योजना शुरू नहीं हो सकी। सबसे बड़ी बात यह है कि पानी सप्लाई शुरू होने से पहले ही कई जगह पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है।

लोगों का कहना है कि सरकार ने लाखों रुपए खर्च कर योजना तो बना दी, लेकिन उसका लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंचा। अब टंकी केवल शोपीस बनकर रह गई है।

बगासपुरा में एक हैंडपंप के भरोसे पूरा गांव

Bagaspura गांव में भी स्थिति बेहद खराब है। करीब 1500 की आबादी वाले इस गांव में केवल एक हैंडपंप चालू हालत में है। पूरे गांव के लोग उसी एक हैंडपंप से पानी भरने को मजबूर हैं।

सुबह होते ही महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पानी के बर्तन लेकर लाइन में लग जाते हैं। कई लोग साइकिल पर डिब्बे और कुप्पे बांधकर पानी भरने पहुंचते हैं। भीषण गर्मी में घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद लोगों को मुश्किल से पीने भर का पानी मिल पाता है।

महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित

जलसंकट का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। महिलाओं को सुबह से कई चक्कर लगाकर पानी लाना पड़ता है। बच्चे भी पढ़ाई छोड़कर पानी भरने में परिवार की मदद कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार पानी के लिए विवाद की स्थिति भी बन जाती है। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।

प्रशासनिक इंतजाम नाकाफी

ग्रामीणों का आरोप है कि जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। टैंकरों की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। लोगों ने मांग की है कि जल्द से जल्द नल-जल योजना शुरू की जाए और गांवों में अतिरिक्त जलस्रोत उपलब्ध कराए जाएं।

भीषण गर्मी के बीच सागर जिले के गांवों की यह तस्वीर साफ बताती है कि जल संकट अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर मानवीय समस्या बनता जा रहा है।

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