कृषि विज्ञान केंद्र, सागर के वैज्ञानिकों ने जिले के किसानों को फसलों में पोषक तत्वों की कमी से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। वैज्ञानिकों ने बताया कि फसल में किसी भी प्रकार के पोषण संबंधी घोल या सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करते समय प्रति एकड़ 150 लीटर पानी का उपयोग अनिवार्य रूप से करें, ताकि घोल का समान और प्रभावी वितरण हो सके।
छिड़काव का सही समय है अत्यंत आवश्यक
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार फसलों पर छिड़काव हमेशा—
- प्रातःकाल (सुबह)
- या सायंकाल (शाम)
के समय ही करना चाहिए। दोपहर के समय छिड़काव करने से दवा या पोषक तत्व का प्रभाव कम हो जाता है और पत्तियों के जलने की संभावना भी बनी रहती है। सही समय पर छिड़काव करने से पौधे पोषक तत्वों को बेहतर ढंग से अवशोषित कर पाते हैं।

10 दिन बाद पुनः छिड़काव की सलाह
यदि एक बार छिड़काव करने के बाद भी फसल में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण पूरी तरह समाप्त न हों, तो 10 दिन के अंतराल पर पुनः छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इससे पौधों को आवश्यक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं और फसल की बढ़वार में सुधार होता है।
लक्षण पहचानना है सबसे जरूरी
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसलों का नियमित निरीक्षण करें और यह ध्यानपूर्वक पहचानें कि—
- पत्तियों का पीला पड़ना
- बढ़वार का रुक जाना
- पत्तियों पर धब्बे या झुलसा
जैसे लक्षण किस पोषक तत्व की कमी की ओर संकेत कर रहे हैं। सही पहचान के बिना छिड़काव करने से समस्या दूर होने के बजाय बढ़ भी सकती है।

समस्या गंभीर हो तो विशेषज्ञों से लें सलाह
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि यदि फसल में समस्या अधिक गंभीर हो, या लक्षण स्पष्ट रूप से समझ में न आ रहे हों, तो किसान कृषि विज्ञान केंद्र, सागर के वैज्ञानिकों से सीधे संपर्क कर सलाह अवश्य लें। विशेषज्ञों की मार्गदर्शन से समय पर सही उपचार संभव है, जिससे उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।
किसानों के लिए संदेश
कृषि विज्ञान केंद्र, सागर ने किसानों से कहा है कि—
- संतुलित पोषण
- सही समय पर छिड़काव
- वैज्ञानिक सलाह का पालन
करके फसल की बेहतर पैदावार प्राप्त की जा सकती है। जागरूकता और सावधानी ही अच्छी खेती की कुंजी है।