मध्य प्रदेश के सागर जिला में एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। केसली थाना क्षेत्र के नन्ही देवरी खमरिया गांव में एक महिला ने अपनी चार मासूम बेटियों को कुएं में फेंक दिया और बाद में खुद भी फंदे से लटकी मिली। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है।
घटना कैसे सामने आई
गुरुवार सुबह जब घर के लोगों ने देखा कि महिला और बच्चे घर में नहीं हैं, तो उनकी तलाश शुरू की गई। गांव और आसपास के खेतों में खोजबीन की गई।

करीब घर से 500 मीटर दूर 20 फीट गहरे कुएं में सबसे बड़ी बेटी का शव पानी में दिखाई दिया। यह देखकर ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
पुलिस मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से कुएं में तलाशी ली गई। इसके बाद कुएं से चारों बेटियों के शव बरामद हुए। वहीं महिला का शव कुएं से लगभग 100 मीटर दूर एक पेड़ पर फंदे से लटका मिला।
मृतकों की पहचान
इस घटना में 30 वर्षीय सविता बाई और उनकी चार बेटियों की मौत हुई है। बेटियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- अंशिका (7 वर्ष)
- रक्षा (5 वर्ष)
- दीक्षा (3 वर्ष)
- मनीषा (5 महीने)

बताया गया कि सबसे छोटी बच्ची मनीषा को चादर में बांधकर कुएं में डाला गया था।
बहन ने बताया क्या हुआ था
मृतका की छोटी बहन मीना ने बताया कि वह बचपन से ही अपनी बहन के साथ रहती थी। घटना की रात घर में वह, सविता और चारों बच्चे थे।
मीना ने बताया कि रात में खाना खाने के बाद सभी सो गए थे। वह तीन बच्चियों के साथ अलग कमरे में सो रही थी, जबकि सविता अपनी सबसे छोटी बेटी के साथ दूसरे कमरे में थी।
देर रात सविता आई और तीनों बड़ी बेटियों को नींद से उठाकर अपने साथ ले गई। मीना की नींद खुली लेकिन उसने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
सुबह जब वह उठी तो पाया कि कमरे का दरवाजा बाहर से बंद था। जब दरवाजा खोला गया तो घर में न सविता थी और न ही बच्चे।

ससुर का बयान
महिला के ससुर ज्ञानी सिंह लोधी ने बताया कि वह गांव में एक शादी समारोह में गए हुए थे। रात करीब 3 बजे घर लौटे और थकान के कारण सो गए।
सुबह जब परिवार के अन्य सदस्य जागे तो पता चला कि बच्चे घर में नहीं हैं और बहू की बहन कमरे में बंद है। दरवाजा खोलने के बाद महिला और बच्चों की तलाश शुरू हुई।
करीब एक घंटे की खोज के बाद कुएं में एक बच्ची का शव दिखाई दिया। इसके बाद कुएं से चारों बच्चियों के शव निकाले गए और कुछ दूरी पर पेड़ से महिला का शव लटका मिला।

पति 11 महीने से घर नहीं आया था
परिवार के अनुसार सविता का पति चंद्रभान लोधी करीब 11 महीने पहले काम पर जाने की बात कहकर घर से गया था। बताया जाता है कि वह जबलपुर में बस पर काम करता था।
वह कभी-कभी फोन पर बात करता था, लेकिन लंबे समय से घर नहीं लौटा था। घटना के बाद से परिवार वाले उससे संपर्क भी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि सविता ने पहले ही अपना सिम कार्ड तोड़कर फेंक दिया था और किसी के पास उसका नंबर नहीं है।
बेटी होने को लेकर तनाव की चर्चा
गांव के लोगों और परिवार के अनुसार सविता की चारों संतानें बेटियां थीं। सबसे छोटी बेटी का जन्म करीब 5 महीने पहले हुआ था।
बताया जा रहा है कि बेटी होने की वजह से पति-पत्नी के बीच तनाव था। पति ने नवजात बेटी को देखने तक नहीं आया था। ग्रामीणों का कहना है कि यही कारण महिला के मानसिक तनाव की वजह बन सकता है, हालांकि पुलिस अभी जांच कर रही है।
मायका पास ही था
सविता का मायका पलोह गांव में है, जो उसके ससुराल से करीब 5 किलोमीटर दूर है। लगभग 9 साल पहले उसकी शादी चंद्रभान से हुई थी।
शादी के बाद से उसकी छोटी बहन मीना भी उसी घर में रह रही थी। वह वहीं रहकर पढ़ाई करती थी और घर के कामों में भी हाथ बंटाती थी।

पुलिस जांच जारी
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिला ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया।
✅ निष्कर्ष:
यह घटना समाज में मौजूद कई गंभीर समस्याओं की ओर इशारा करती है—जैसे बेटा-बेटी का भेदभाव, पारिवारिक तनाव और मानसिक दबाव। चार मासूम बच्चियों और उनकी मां की मौत से पूरे गांव में गहरा दुख और शोक का माहौल है।