सागर में चेटीचंड के अवसर पर भगवान झूलेलाल जयंती धूमधाम और भव्यता के साथ मनाई गई। इस अवसर पर श्री झूलेलाल मंदिर ट्रस्ट एवं सकल सिंधी समाज द्वारा एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे शहर को भक्ति और उत्साह से सराबोर कर दिया।
शोभायात्रा की शुरुआत शाम 5 बजे संत कंवरराम वार्ड स्थित श्री झूलेलाल मंदिर से हुई। विशेष आकर्षण यह रहा कि भगवान झूलेलाल को 46 साल पुराने पारंपरिक झूले में विराजमान कर सजे-धजे रथ पर नगर भ्रमण कराया गया। यह रथ करीब एक क्विंटल सतरंगी फूलों से सजाया गया था, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
करीब 500 मीटर लंबी इस शोभायात्रा में घोड़े, डीजे, शहनाई, बैंड पार्टी, संत कंवरराम और शहीद हेमू कालानी की झांकियां शामिल थीं। श्रद्धालु भजन और डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए भगवान के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। इस भव्य यात्रा को लगभग 6 किलोमीटर का मार्ग तय करने में करीब 4 घंटे का समय लगा।

शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों—भगवानगंज, राधा तिराहा, शास्त्री मार्केट, गुजराती बाजार, कटरा, तीनबत्ती और कोतवाली से होती हुई चकराघाट पहुंची। रास्ते में जगह-जगह विभिन्न समाजों और समुदायों के लोगों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। श्रद्धालुओं को फल, जूस और आइसक्रीम वितरित कर सेवा का भाव भी प्रदर्शित किया गया।
झूलेलाल मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सुशील लहरवानी ने बताया कि रथ के साथ करीब एक क्विंटल प्रसादी—जिसमें खिचड़ी और फल शामिल थे—श्रद्धालुओं में वितरित की गई। इससे भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
महोत्सव के अंतर्गत एक विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें लगभग 5 हजार श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी तैयार की गई। भंडारे की खास बात यह रही कि 40 कारीगरों की टीम ने लगातार 10 घंटे की मेहनत से भोजन तैयार किया। इसमें दो प्रकार की सब्जियां, पुड़ी, रोटी, दाल-चावल, रायता और बूंदी जैसे व्यंजन शामिल थे। भोजन वितरण के लिए स्वयंसेवकों की विशेष व्यवस्था की गई, जिससे पूरा आयोजन सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष मोहन लाल सौम्या ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत प्रभातफेरी से हुई थी। इसके बाद बहराणा साहब की सवारी ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों—संत कंवरराम वार्ड, सदर और सिविल लाइन—का भ्रमण किया। वहीं सुबह 11 बजे से श्री झूलेलाल मंदिर में श्री गुरु ग्रंथ साहब के अखंड पाठ का आयोजन भी किया गया।
रात करीब 9:30 बजे चकराघाट पर अखंड ज्योत का विसर्जन किया गया, जिसके साथ ही पूरे आयोजन का समापन हुआ।
इस भव्य शोभायात्रा और धार्मिक आयोजनों ने न केवल सिंधी समाज की आस्था और परंपराओं को जीवंत किया, बल्कि शहर में सामाजिक समरसता और उत्सव का माहौल भी बनाया। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।