छतरपुर। नौगांव स्थित गवर्नमेंट बापू डिग्री कॉलेज में शनिवार को आयोजित एमएससी द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा के बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि वनस्पति विज्ञान विषय का प्रश्नपत्र यूनिवर्सिटी द्वारा निर्धारित सिलेबस से बाहर आया था। इससे परीक्षा में शामिल अधिकांश छात्र-छात्राएं परेशान हो गए और परीक्षा समाप्त होते ही कॉलेज प्रशासन तथा परीक्षा विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
जानकारी के अनुसार कॉलेज में महाराजा छत्रसाल यूनिवर्सिटी से संबद्ध एमएससी सेकंड सेमेस्टर के “Morphology, Anatomy and Embryology of Angiosperm” विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा खत्म होते ही बड़ी संख्या में छात्र सीधे प्राचार्य कक्ष और परीक्षा विभाग पहुंचे तथा प्रश्नपत्र को आउट ऑफ सिलेबस बताते हुए नाराजगी जताई।

विद्यार्थियों का कहना था कि उन्होंने महीनों तक यूनिवर्सिटी द्वारा जारी अधिकृत सिलेबस और कैरीकुलम के आधार पर तैयारी की थी, लेकिन परीक्षा में ऐसे प्रश्न पूछ लिए गए जो निर्धारित पाठ्यक्रम में शामिल ही नहीं थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र देखकर अधिकांश परीक्षार्थी घबरा गए थे और कई सवाल ऐसे थे जिन्हें उन्होंने कभी पढ़ा ही नहीं।
परीक्षा देकर बाहर निकले कई छात्र बेहद मायूस और तनाव में दिखाई दिए। विद्यार्थियों ने कहा कि वे अच्छे अंकों की उम्मीद के साथ परीक्षा देने पहुंचे थे, लेकिन आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न आने से उनका पूरा प्रदर्शन प्रभावित हो गया। कुछ छात्रों ने बताया कि पेपर का बड़ा हिस्सा पाठ्यक्रम से मेल नहीं खा रहा था, जिसके कारण उन्हें उत्तर लिखने में भारी परेशानी हुई।
एक छात्र ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि “जिसे पढ़ाया ही नहीं गया और जो सिलेबस में था ही नहीं, वही परीक्षा में पूछ लिया गया। ऐसे में छात्र आखिर कैसे अच्छे अंक लाएंगे?” विद्यार्थियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी की इस लापरवाही का सीधा असर उनके रिजल्ट और भविष्य पर पड़ सकता है।

घटना के बाद नाराज छात्रों ने सामूहिक रूप से आवेदन तैयार कर परीक्षा नियंत्रक और कॉलेज प्रशासन को सौंपा। आवेदन में छात्रों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और परीक्षा को निरस्त कर पुनः परीक्षा आयोजित की जाए। छात्रों ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जब सिलेबस पहले से निर्धारित था, तो प्रश्नपत्र तैयार करने वालों ने उसकी जांच क्यों नहीं की। छात्रों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में इस तरह की गलतियां विद्यार्थियों के मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं और उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं।
कॉलेज परिसर में परीक्षा के बाद देर तक इसी मुद्दे को लेकर चर्चा होती रही। छात्र समूहों में एकत्र होकर प्रश्नपत्र की तुलना सिलेबस से करते रहे और कई छात्रों ने दावा किया कि प्रश्नपत्र के अनेक प्रश्न निर्धारित यूनिट से बाहर थे।
कुछ विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा से पहले उन्हें जो अध्ययन सामग्री और गाइडलाइन उपलब्ध कराई गई थी, उसमें इन विषयों का कोई उल्लेख नहीं था। ऐसे में अचानक परीक्षा में अलग विषयों से प्रश्न पूछे जाने से वे पूरी तरह असहज हो गए।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालय परीक्षाओं में सिलेबस के अनुरूप प्रश्नपत्र तैयार होना अत्यंत आवश्यक है। यदि प्रश्नपत्र निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर आता है, तो इससे न केवल छात्रों का आत्मविश्वास प्रभावित होता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
कॉलेज प्रशासन ने छात्रों की शिकायतें सुनने के बाद मामले को विश्वविद्यालय तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक यूनिवर्सिटी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
छात्रों का कहना है कि वे केवल निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था चाहते हैं। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और भविष्य को सुरक्षित रखना है। विद्यार्थियों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द उचित निर्णय ले, ताकि छात्रों का शैक्षणिक नुकसान न हो।
फिलहाल छात्रों की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।