सीतानगर जलाशय में हजारों मछलियों की मौत: जहर डालने का आरोप, मांझी समाज ने सौंपा ज्ञापन !

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दमोह जिले के सीतानगर जलाशय में मंगलवार को एक गंभीर और चिंताजनक घटना सामने आई, जहां हजारों मछलियां मृत अवस्था में पाई गईं। इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और स्थानीय मछुआरा समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। मांझी समाज ने इस घटना को साजिश करार देते हुए आरोप लगाया है कि जलाशय में जानबूझकर जहरीला पदार्थ डाला गया है।

लाखों का नुकसान, समिति पर असर

मांझी समाज और संबंधित मत्स्य सहकारी समिति का कहना है कि जलाशय में हाल ही में लाखों रुपए का मछली बीज डाला गया था। मछलियों की अचानक मौत से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

ग्रामीण रायकवार माझी समाज के जिला अध्यक्ष मोंटी रैकवार के अनुसार, यह केवल प्राकृतिक घटना नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे किसी की सोची-समझी साजिश है।

जहरीला पदार्थ डालने का आरोप

समाज के लोगों ने आरोप लगाया है कि सोमवार रात कुछ असामाजिक तत्वों ने जलाशय में जहरीला पदार्थ मिला दिया, जिससे बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हो गई।

उनका कहना है कि इस तरह की हरकत का उद्देश्य समिति को आर्थिक नुकसान पहुंचाना और अवैध रूप से मछली पकड़ने का रास्ता साफ करना हो सकता है।

अवैध मछली पकड़ने का मामला

समिति ने प्रशासन को यह भी बताया कि सीतानगर जलाशय क्षेत्र में ‘मडकोलेश्वर मछुआ सहकारी समिति’ नाम से कोई पंजीकृत संस्था नहीं है। इसके बावजूद कुछ लोग इस नाम का उपयोग कर अवैध रूप से मछलियां पकड़ रहे हैं।

आरोप है कि यही लोग जहर डालकर मछलियों को मार रहे हैं, ताकि उन्हें आसानी से पकड़ सकें और बेच सकें।

प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

घटना के विरोध में मांझी समाज के लोगों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन सौंपने के दौरान समाज के कई प्रमुख सदस्य मौजूद रहे, जिनमें डालचंद रायकवार, लक्खू रायकवार, अशोक पटेल, अंकित माझी और लच्छू रैकवार शामिल हैं।

पर्यावरण और आजीविका पर असर

यह घटना केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है। जलाशय में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे अन्य जलीय जीवों पर भी खतरा मंडरा रहा है।

इसके अलावा, मछली पालन पर निर्भर परिवारों की आजीविका पर भी इसका सीधा असर पड़ा है।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

मांझी समाज ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने छतरपुर मार्ग पर चक्काजाम और प्रदर्शन करने की बात कही है।

इस चेतावनी से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करे।

जांच की मांग और संभावित पहल

स्थानीय लोगों और समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि:

  • जलाशय के पानी की वैज्ञानिक जांच कराई जाए
  • मृत मछलियों का परीक्षण किया जाए
  • क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाए
  • दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पानी में किसी जहरीले पदार्थ की पुष्टि होती है, तो यह एक गंभीर आपराधिक मामला बन सकता है।

सीतानगर जलाशय में हुई यह घटना कई सवाल खड़े करती है—क्या यह वाकई किसी साजिश का हिस्सा है, या इसके पीछे कोई अन्य कारण है?

फिलहाल, मांझी समाज के आरोपों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह जल्द से जल्द जांच पूरी कर सच्चाई सामने लाए और दोषियों को सजा दिलाए।

यह घटना न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए खतरा है, बल्कि इससे जुड़े लोगों की आजीविका पर भी बड़ा संकट पैदा कर रही है।

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