ग्वालियर | वित्तीय वर्ष के इस दौर में रियल एस्टेट कारोबार में मार्च माह की आमदनी का पारंपरिक उछाल इस बार दिखाई नहीं दे रहा है। इसका मुख्य कारण निवेशकों का सोना और चांदी की ओर रुख करना बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लोग हमेशा मुनाफे के उद्देश्य से ही निवेश करते हैं। जनवरी-फरवरी में सोना और चांदी की कीमतों में तेजी आई और थोड़े-बहुत उतार-चढ़ाव के बाद यह स्थिर हो गई। इसके परिणामस्वरूप निवेशकों ने अपने पैसे को इन धातुओं में लगाया। इसका असर भूमि और रियल एस्टेट कारोबार पर प्रत्यक्ष दिख रहा है।
सरकारी कर्मचारियों को पूरा भुगतान न मिलने और फसलों की खराब स्थिति के कारण मनी सर्कुलेशन धीमा पड़ गया है। इसके चलते रियल एस्टेट में पहले जैसा निवेश नहीं हो रहा। पहले लोग शेयर बाजार, फिर क्रिप्टो और अब सोना-चांदी में निवेश कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी खेती-किसानी करने वाले लोग सोने-चांदी में निवेश की सलाह लेने लगे हैं, जो बाजार में सुनामी जैसी निवेश प्रवृत्ति का संकेत है।

इसके अलावा, अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री पर रोक और वैध कॉलोनियों में महंगी दरों पर रजिस्ट्री होने की वजह से निवेशक भूमि में निवेश से बच रहे हैं।
वरिष्ठ जिला पंजीयक अशोक शर्मा ने बताया कि इस बार दस्तावेज पंजीयन कम हुए हैं। जिले को इस वित्तीय वर्ष में 1050 करोड़ रुपए राजस्व वसूली का लक्ष्य मिला है, जिसमें दो दिन पहले तक केवल 617 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। शुक्रवार को वृत-1 और 2 में कुल 219 रजिस्ट्री हुईं।
वरिष्ठ उप पंजीयक के एन वर्मा ने बताया कि पहले जैसी भीड़ नहीं है और काम कम है। वहीं, अभिभाषक मनीष मंगल ने कहा कि रजिस्ट्री स्लॉट बुकिंग इस समय आसानी से हो रही है और इसमें कोई समस्या नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब सोना-चांदी में निवेश से कम समय में अधिक मुनाफा मिल रहा है, तो निवेशक संपत्ति से दूरी बना रहे हैं। इसके चलते भूमि पंजीयन में गिरावट और राजस्व वसूली पर असर दिखाई दे रहा है।
इस साल रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों की नजरें सोने-चांदी और अन्य अल्टरनेटिव निवेश की ओर अधिक रही हैं, जिससे पारंपरिक रियल एस्टेट गतिविधियां सुस्त पड़ी हैं।